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Saturday, September 30, 2017

शश-योग

शश-योग



शश योग फलित ज्योतिष में एक बहुत महत्वपूर्ण योग है जो की पंच-महापुरुष योगों में से एक है शश योग शनि से सम्बंधित एक योग है जो जन्मकुंडली में शनि की एक विशेष स्थिति में होने पर बनता है तथा शश योग को बहुत शुभ परिणाम देने वाला भी माना गया है........ ज्योतिषीय नियमानुसार जन्मकुंडली में यदि शनि अपनी स्व या उच्च राशि (मकर, कुम्भ, तुला) में होकर केंद्र (पहला, चौथा, सातवां, दसवां भाव) में स्थित हो तो इसे "शश योग" कहते हैं इस प्रकार कुंडली में शश योग बनने पर शनि बहुत बली व मजबूत स्थिति में होता है जिससे यह योग व्यक्ति को बहुत शुभ परिणाम देता है। ......... ज्योतिष में शनि को कर्म, आजीविका, जनता, सेवक, नौकरी, तकनिकी कार्य, मशीन, प्राचीन वस्तु, दूरदर्शिता, गहन अध्यन, पाचन तंत्र, लोहा, स्टील आदि का कारक माना गया है......... यदि कुंडली में शश योग बन रहा हो तो यह आजीविका या करियर की दृष्टि से बहुत शुभ होता है ऐसा व्यक्ति अपने करियर या कर्म क्षेत्र में बहुत विशेष उन्नति प्राप्त करता है और अच्छे स्तर पर रहकर कार्य करता है और करियर में अच्छी सफलता मिलती है इसके अलावा शश योग बनने पर व्यक्ति गूढ़ सोच रखने वाला और दूरद्रष्टा होता है, तकनीकी कार्यों में ऐसे व्यक्ति की विशेष रुचि होती है, शश बनने पर व्यक्ति बहुत अनुशाशन प्रिय और प्रत्येक कार्य को कठोरता से पालन करने वाला होता है, प्राचीन वस्तुओं और गूढ़ ज्ञान में भी ऐसे व्यक्ति की विशेष रुचि होती है अपनी कर्म प्रधानता से ऐसा व्यक्ति अच्छा यश भी पाता है............... यदि कुंडली में शश योग बना हो तो ऐसे व्यक्ति को तकनीकी, मशीनों और वाहनों से जुड़े कार्यों में अच्छी सफलता मिलती है इसके अतिरिक्त केमिकल प्रोडक्ट्स, लोहा, स्टील, काँच, प्लास्टिक, पेट्रोल और पेट्रोलयम प्रोडक्ट्स से जुड़े कार्य में भी ऐसा व्यक्ति सफलता पाता है, शश योग को राजयोग की श्रेणी में भी रखा गया है यदि कुंडली में शश योग अच्छी प्रकार बन रहा हो और अन्य ग्रहों और पाप योगों से बाधित ना हो तो व्यक्ति अपने जीवन में विशेष सफलता और समृद्धि भी प्राप्त करता है।