Friday, January 12, 2018

कौनसे ग्रहयोग बनाते हैं कर्ज की स्थिति क्या है ज्योतिषीय समाधान -

कौनसे ग्रहयोग बनाते हैं कर्ज की स्थिति क्या है ज्योतिषीय समाधान -

हमारा जन्म होते ही हम सभी अपने प्रारब्ध के चक्र से बंध जाते हैं और जन्मकुंडली हमारे इसी प्रारब्ध को प्रकट करती है हमारे जीवन में सभी घटनाएं नवग्रह द्वारा ही संचालित होती हैं।  आज के समय में जहाँ आर्थिक असंतुलन हमारी चिंता का एक मुख्य कारण है वहीँ एक दूसरी स्थिति जिसके कारण अधिकांश लोग चिंतित और परेशान रहते हैं वह है "कर्ज" धन का कर्ज चाहे किसी से व्यक्तिगत रूप से लिया गया हो या सरकारी लोन के रूप में ये दोनों ही स्थितियां व्यक्ति के ऊपर एक बोझ के समान बनी रहती हैं कई बार ना चाहते हुये भी परिस्थितिवश व्यक्ति को इस कर्ज रुपी बोझ का सामना करना पड़ता है वैसे तो आज के समय में अपने कार्यो की पूर्ती के लिए अधिकांश लोग कर्ज लेते हैं परन्तु जब जीवन पर्यन्त बनी रहे या बार बार सामने आये तो वास्तव में यह भी हमारी कुंडली में बने कुछ विशेष ग्रहयोगों के कारण ही होता है -

" हमारी कुंडली में "छटा भाव" कर्ज का भाव माना गया है अर्थात कुंडली का छटा भाव ही व्यक्ति के जीवन में कर्ज की स्थिति को नियंत्रित करता है इसके अलावा मंगल को नैसर्गिक ऋण-नियंत्रक ग्रह माना गया है, जब कुंडली के छटे भाव में कोई पाप योग बना हो या षष्टेश ग्रह बहुत पीड़ित हो या मंगल बहुत पीड़ित और नकारात्मक स्थिति में हो तो व्यक्ति को कर्ज की समस्या का सामना करना पड़ता है जैसे - यदि छटे भाव में कोई पाप ग्रह नीच राशि में बैठा हो, छटे भाव में राहु-चन्द्रमाँ या राहु-सूर्य के साथ होने से ग्रहण योग बन रहा हो, छटे भाव में राहु मंगल का योग हो, छटे भाव में गुरु-चाण्डाल योग बना हो, शनि-मंगल या केतु-मंगल की युति छटे भाव में हो तो ऐसे पाप या क्रूर योग जब कुंडली के छटे भाव में बनते हैं तो व्यक्ति को कर्ज की समस्या बहुत परेशान करती है और री-पेमेंट में बहुत समस्यायें आती हैं। छटे भाव का स्वामी ग्रह भी जब नीच राशि में हो अष्टम भाव में हो या बहुत पीड़ित हो तो कर्ज की समस्या होती है इसके अलावा "मंगल" को कर्ज का नैसर्गिक नियंत्रक ग्रह माना गया है अतः यहाँ मंगल की भी महत्वपूर्ण भूमिका है यदि कुंडली में मंगल अपनी नीच राशि(कर्क) में हो आठवें भाव में बैठा हो या अन्य प्रकार से अति पीड़ित हो तो भी कर्ज की समस्या बड़ा रूप ले लेती है"  

विशेष -

यदि छटे भाव में बने पाप योग पर बलि बृहस्पति की दृष्टि पड़ रही हो तो कर्ज का रीपेमेंट संघर्ष के बाद हो जाता है या व्यक्ति को कर्ज की समस्या का समाधान मिल जाता है परन्तु बृहस्पति की शुभ दृष्टि के आभाव में समस्या बनी रहती है छटे भाव में पाप योग जितने अधिक होंगे उतनी समस्या अधिक होगी अतः कुंडली का छठा भाव पीड़ित होने पर लोन आदि लेने में भी बहुत सतर्कता बरतनी चाहिये

बहुत बार व्यक्ति की कुंडली अच्छी होने पर भी व्यक्ति को कर्ज की समस्या का सामना करना पड़ता है जिसका कारण उस समय कुंडली में चल रही अकारक ग्रहों की दशाएं या गोचर ग्रहों का प्रभाव होता है जिससे अस्थाई रूप से व्यक्ति उस विशेष समय काल के लिए कर्ज के बोझ से घिर जाता है उदाहरणार्थ अकारक षष्टेश और द्वादशेश की दशा व्यक्ति कर्ज समस्या देती है अतः प्रत्येक व्यक्ति की कुंडली में अलग अलग ग्रह-स्थिति  और अलग अलग दशाओं के कारण व्यक्तिगत  रूप से तो गहन विश्लेषण के बाद ही किसी व्यक्ति के लिए चल रही कर्ज समस्या के सटीक ज्योतिषीय उपाय निश्चित किये जा सकते हैं अतः यहाँ हम कर्जमुक्ति के लिए ऐसे कुछ मुख्य उपाय बता रहे हैं  जिन्हें कोई भी व्यक्ति कर सकता है

उपाय -

1. मंगल यन्त्र को घर के मंदिर में लाल वस्त्र पर स्थापित करें और प्रतिदिन इस मंत्र का एक माला जाप करें - ॐ क्राम क्रीम क्रोम सः भौमाय नमः।

2. प्रति दिन ऋणमोचन मंगल स्तोत्र का पाठ करें।

3. हनुमान चालीसा का पाठ करें।

।।श्री हनुमते नमः।।

राहु का चमत्कार

राहु का चमत्कार
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राहु जिस भाव में बैठता है, मानो जैसे उस भाव में आन्धिया चलने लगती हैं, वो भाव स्थिर नहीं रह सकता | और अगर आपने उस भाव को स्थिर रख लिया तो यकीनी तौर पर तुम राहु को नराज़ कर बैठोगे | तो राहु को खुश करने का सिर्फ़ एक ही तरीका है कि उस भाव को राहु के रंग में रंग दो, और फ़िर राहु के रंग को अपनी ज़िन्दगी में उतरने दो, फ़िर देखना जब राहु का रंग तुम पर चडेगा तो किसी और रंग की ज़रुरत नहीं पडेगी, और यही है रंग राहु.......

जैसे किसी की कुण्डली में राहु लगन में बैठा है, तो यकीनी तौर पर उसकी बाडी सटेबल नहीं रहेगी, जैसे अंदर से नबज़ तेज़ चल रही हो, धड़कने हमेशा बढी ही रहती हो, मानो जैसे बाडी में कम्पन ही लगा रहता हो | तो यकीनी तौर पर करीयर की सफ़लता में भी दिक्कत बन जाती है ये शरीर की कमज़ोरी | तो क्यु ना इस कमज़ोरी को ही ताकत में बदल दिया जाये | राहु की शर्त है कि जातक की बाडी सटेबल नहीं रहेगी तो ठीक है सटेबल ना रखो, करीयर खेल कूद में बनायो, डान्सिन्ग में बनायो, जिस से तुम्हारी बाडी लगातार झूमती रहे, धड़कने बढी रहे, और राहु की शर्त पूरी हो | फ़िर देखो राहु का रंग तुम पर चडेगा और क्या खूब चढेगा, कि किसी और रंग की ज़रुरत ही ना पडेगी |


राहु कुण्डली के दूसरे भाव में
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कुण्डली का दूसरा भाव खाने और वस्त्रों से सम्बन्धित है | और राहु हमेशा दूसरो का ध्यान चाहता है | और क्या होगा, जब राहु दूसरे स्थान की चीज़ो को प्रयोग करेगा, लोगो का ध्यान खीचने में | जातक की दुकान हो सकती है खाने से सम्बन्धित, जातक की दुकान हो सकती है कपडो से सम्बन्धित | जातक को होटेल मैनेज़मेन्ट में सफ़लता प्राप्त होने के चान्स बढ जाते हैं | जातक फ़ैशन इन्डसट्री में भी करीयर बना सकता है | कपडो पर डिज़ाइनिग से सम्बन्धित कार्य में भाग्य को आज़मा सकता है | लेकिन शर्त ये है कि बुध कुण्डली में पीडित नहीं होना चाहिये, मज़बूत स्थिति में होना चाहिये | तभी जातक को इन सब में सफ़लता मिलेगी |

और यदि राहु दूसरे भाव में बुरे फ़ल दे रहा हो तो कटी फ़टी जीन्स नहीं पहननी चाहिये | फ़ास्ट फ़ूड और मैदे वाला भोजन कम से कम खाना चाहिये | खाने के बाद सोन्फ़ और गुड का सेवन करना चाहिये | बुध को अच्छा करने के लिये दूध में हरी इलायची डाल कर पीना चाहिये | महीने में कम से कम एक बार बड़े होटेल में खाना चाहिये | सुबह उठ कर शहद का सेवन करना चाहिये | गुरुवार के दिन मसतक पर हलदी का तिलक करना चाहिये | गले में हरे रंग के धागे में ताम्बे का सिक्का धारण करना चाहिये | गुरुवार के दिन कन्यायो में बेसन की मिठाई बाँटनी चाहिये | कच्चा कोयला, उडद की दाल, काले तिल और नारियल पानी में प्रवाहित करने चाहिये | गुरुवार के दिन नमक का सेवन नही करना चाहिये और चने की दाल का धर्मस्थान में दान करना चाहिये |


राहु कुण्डली के तीसरे भाव में
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और तीसरा भाव होता है वाणी का, छोटी यात्रायो का, ई - मेल आदि से सम्बन्धित है | तो क्या होगा जब राहु इन सब का प्रयोग अपने लिये करेगा | ऐसे में जातक को ईन्टरनेट से सम्बन्धित कार्य, मारकिट में सम्बन्धित कार्य, काल सैंटर आदि में नौकरी, किसी भी तरह के ऐसे कार्य जिसमे टेकनालोजी के माध्यम से सेवाये देनी हो, खराब चीज़ो को रिपेयर करने के कार्य में जातक को सफ़लता मिलने के चान्स बढ जाते हैं | जातक घर से दूर नौकरी करके सफ़ल जीवन जी सकता है, फ़ौज और पुलिस विभाग, खेलों में भी जातक अपने भाग्य को आज़मा सकता है | सिविल इंजीनियर भी जातक बन सकता है |

और यदि तीसरे भाव में राहु बुरे फ़ल दे रहा हो, तो जातक को अपनी माता से चान्दी की चैन लेकर गले में धारण करनी चाहिये | दुर्गा माता के लिये अराधना करनी चाहिये | हर महीने की अशटमी तिथि पर व्रत करना चाहिये और कन्यायो की सेवा करनी चाहिये | मंगलवार के दिन चमेली के तेल का दिया हनुमान जी के आगे जलाना चाहिये | अपने से छोटे भाई - बहनो को खुश रखना चाहिये | मंगलवार के दिन बजरंग बाण का पाठ करना चाहिये | नारियल हनुमान जी या फ़िर दुर्गा माता के चरणो में अरपित करना चाहिये | लाल और हरे रंग के वस्त्रों का प्रयोग कम से कम करना चाहिये | यदि बुध कमज़ोर है तो बुध के उपाये करने चाहिये और बुरे संगत के दोस्तों से बचना चाहिये

राहु कुण्डली के चोथे भाव में
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यदि कुण्डली में बुध ग्रह की स्थिति अच्छी है तो जातक प्रापरटी से सम्बन्धित कार्यो में, घरो को सजाने से सम्बन्धित कार्यो में, टैक्सटाइल डिज़ाइन जैसे कार्यो में, इन्टिरीयर डिज़ाइन जैसे कार्यो में, दवाइयां से सम्बन्धित कार्यो में, अध्यापन जैसे कार्यो में और मैनेज़मेन्ट के कार्यो में जातक अपने भाग्य को आज़मा सकता है |

और यदि चोथे भाव मे राहु बुरे फ़ल दे रहा हो, तो जातक को घर में गंगा जल रखना चाहिये | रोज़ पानी में गंगा जल मिला कर स्नान करना चाहिये | माता का कभी भी अनादर नहीं करना चाहिये, और उनहे उपहार दे कर आशिर्वाद प्राप्त करना चाहिये | ध्यान और मैडिटेशन करना चाहिये | हर रोज़ सुर्य को जल देना चाहिये और नियमित गायत्री मन्त्र का जप करना चाहिये | अमावस्या के दिन वृद्ध महिला को उपहार दे कर आशिर्वाद प्राप्त करना चाहिये | पूर्णिमा के दिन उपवास करना चाहिये और सत्य नारायण की कथा पड़नी चाहिये | मामा और मौसी से सम्बन्ध अच्छे रखने चाहिये, यदि उनको किसी चीज़ की ज़रुरत है तो मदद करनी चाहिये | गुरु शरण में रहना चाहिये और बुरे विचारो का त्याग करना चाहिये | और गर्मी के मौसम में मीठे शरबत का ज़रूर दान करना चाहिये


राहु कुण्डली के पांचवे स्थान में
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यदि कुण्डली में बुध की स्थिति अच्छी है तो ऐसे में जातक को क्रिएटिव कार्य में भाग्य आज़माना चाहिये, जैसे कि चीज़ो को सजाना, कोई डिज़ाइन त्यार करना, होटेल मैनेज़मेन्ट के कार्य, स्टाक मार्कीट और शेयर बज़ार में भाग्य आज़माना चाहिये, नावल और कहानिया में भी जातक प्रसिद्ध हो सकता है, पेन्टिग के कार्य, फ़ोटोग्राफ़ी के कार्य, और खास कर लड़कियो के लिये पारलर के कार्य अच्छे साबित हो सकते हैं | जातक को विदेश में भी सफ़लता प्राप्ति के योग बन जाते हैं |

 और यदि इस भाव में राहु बुरे फ़ल दे रहा हो तो, गुरु शरण में जाना चाहिये, तामसिक भोजन का त्याग करना चाहिये | जन्क फ़ूड बन्द कर देना चाहिये और हमेशा ताज़ा और सातविक भोजन करना चाहिये | यदि सेहत समस्या हो तो डाकटरी सलाह लेनी चाहिये और निर्देशनुसार भोजन में हरी सबज़ियो और फ़लो का सेवन करना चाहिये | पेट का ध्यान रखना चाहिये, कबज़ और गैस की समस्या नहीं रहनी चाहिये | हर गुरुवार केले के पेड़ पर जल अरपित करना चाहिये, चने की दाल धर्मस्थान में देनी चाहिये | गुरुवार का व्रत करना चाहिये | गुरुवार के दिन गुड़, घी के साथ हलवा बना कर दान करना चाहिये | और हर अमावस्या पर पित्रो के लिये दान पुण्य करना चाहिये |

राहु कुण्डली के छठे भाव में
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और छठा भाव कर्ज़े, रोग और शत्रु से सम्बन्धित होता है | और जब राहु इस भाव से लोगो का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश करता है तो ऐसे में जातक बैन्किन्ग सैकटर में, चिकित्सक विभाग में, वकालत आदि के कार्यो में, लडाई से सम्बन्धित विभाग जैसे कोट कचहेरी आदि में नौकरी, किसी इन्शोरेन्स कम्पनी में, क्राइम इनवैसटीगेशन विभाव में, कमपियुटर, या फ़िर किसी भी तरह के पारिवारिक व्यवसाय में जातक भाग्य को आज़मा सकता है | इस के इलावा वेबसाइट सन्चालन, कमपियुटर पर चीज़ो के डिज़ाइन त्यार करना, कोई भी नेटवर्क में बिज़नस करना आदि के कार्य में जातक सफ़ल हो सकता है |

 और यदि इस स्थान पर राहु बुरे फ़ल दे रहा हो, तो घर में कुत्ता रखना चाहिये | गली के कुत्ते को तेल लगी रोटी शनिवार के दिन और तन्दूर में बनी रोटी मंगलवार के दिन खिलानी चाहिये | परिन्दो के लिये घर की घत पर भोजन और जल की व्यवस्था करनी चाहिये | शनिवार के दिन भैरव मंदिर में सरसो के तेल का दान करना चाहिये | भैरव मंदिर में शराब चढानी चाहिये और खुद शराब और मासाहार से परहेज़ करना चाहिये | यदि कुण्डली में बुध खराब हो तो बुधवार के दिन बकरी का दान किसी चरवाहे को करना चाहिये | मिट्टी के बरतन में सरसो का तेल भर कर ढक्कन लगा कर उसको किसी जल स्थान के किनारे दबा देना चाहिये | धर्म स्थान में पानी पीने के लिये व्यवसथा करनी चाहिये यस फ़िर किसी पार्क के पास लोगो के लिये जल पीने की व्यवसथा करनी चाहिये | और कर्ज़ लेने से बचना चाहिये, यदि कर्ज़ हो गया हो तो ये उपाये करने चाहिये और कर्ज़ की किश्त मंगलवार के दिन देनी चाहिये |


राहु कुण्डली के सातवें भाव में
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कुण्डली का सातवा भाव सांझेदारी का, जीवन साथी का, करीबी दोसतो का और रिलेशन्ज़ का होता है | बुध और शुक्र से प्रभावित इस स्थान पर राहु के आने से, जब राहु इन सब का प्रयोग लोगो का ध्यान आकर्षित करने के लिये करेगा, तो जातक को ऐसे में किसी भी तरह की डिज़ाइनिग की फ़ील्ड, चाहे कपड़े पर डिज़ाइनिग हो, घरो की डिज़ानिग हो, या अन्य साज सज्जा से सम्बन्धित कार्य हो, कोई जनरल सटोर हो, शिन्गार के सामान की सपलाई करना हो, घरो में सजावट के सामान की विक्री के कार्य हो, अकाउंट से सम्बन्ध कोई कार्य हो, मिठाई और अन्य पकवान की दुकान हो, इन सब में जातक को सफ़लता मिल सकती है | लेकिन पकवानो में फ़ास्ट फ़ूड के कार्य नहीं करने चाहिये, इन से राहु घरेलु जीवन में परेशानी देता है |

 यदि इस स्थान पर राहु बुरे फ़ल दे रहा है तो विवाहिक जीवन में तनाव की स्थिति रहती है | इस लिये बुध और शुक्र के दान करने चाहिये | शुक्रवार के दिन दही से स्नान करना चाहिये | बुधवार के दिन गणपति जी को बुन्दी के लड्डू अरपित करने चाहिये और गणेश चालिसा का पाठ करना चाहिये | नियमित गणेश और लक्ष्मी जी की अराधना करनी चाहिये | जीवन साथी के साथ दो बार फ़ेरे लेने से राहु की शर्त पूरी होती है और विवाह टूटने की नौबत नहीं आती | अमावस्या के दिन खीर का दान किसी महिला को करना चाहिये | हर शुक्रवार शिवलिंग पर दही का अभिषेक करनी से भी विवाहिक जीवन की दिक्कते दूर होती हैं | हरे, नीले और लाल रंग के वस्त्रो का प्रयोग नहीं करना चाहिये | हर वर्ष जीवन साथी को चान्दी का उपहार देने से राहु शान्ति होती है | जीवन साथी के हाथ की सबसे छोटी उन्गली में चान्दी की रिन्ग धारण कराने से जीवन साथी की बात बात पर गुस्सा करने की आदत धीरे धीरे दूर होती जाती है | शुक्रवार के दिन नमक का सेवन ना करके नमकीन चीज़ो का दान करने से विवाहिक जीवन में दिक्कतो दूर होती हैं | गुड या शक्कर को मिट्टी के बरतन में भर कर ज़मीन में दबा देने से भी विवाहिक जीवन की समस्या दूर होती है | इस के इलावा हर शनिवार राहु के दान ज़रुरी है, जिनमे सरसो के तेल का दान, नीले रंग के वस्त्रो का दान, उडद की दाल का दान, काले तिल का दान, शराब, गुटखा और अन्य नशीले पदारथो का दान, नारीयल का दान या फ़िर पानी में बहाने से राहु के बुरे प्रभाव दूर होते है |


राहु कुण्डली के आठवे भाव में
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कुण्डली का आठवा भाव ज़मीन से जुड़े विश्यो से सम्बन्धित है, कोले से सम्बन्धित कार्य, धातु से सम्बन्धित कार्य, तकनीकी शिक्षा से जुडे कार्य, चिकित्सा विभाग से जुडे कार्य, गूढ अध्यन के कार्य इस भाव से सम्बन्धित हैं | जब राहु इन सब का प्रयोग लोगो को आकर्षित करने के लिये करेगा, तो ऐसे में जातक को जमीन से जुडे कार्य जैसे आइल और पैटरोल आदि से सम्बन्धित, तकनीकी शिक्षा से सम्बन्धित कार्य जैसे कमपियुटर और इंजीनियर आदि, कोई ज्वैलर से सम्बन्धित, खाने की चीज़ो स्र सम्बन्धित कार्य, कोई नयी रिसरच के कार्य, ज्योतिष से सम्बन्धित कार्य, धन का निवेश करने से सम्बन्धित कार्य में भाग्य आज़माना चाहिये |

यदि इस स्थान पर राहु बुरे फ़ल दे रहा हो, तो घर के टाएलेट और बाथरूम सम्बन्धी दोश को दूर करें | घर में किसी तरह का कबाड़ ना रखें | सुबह देर तक ना सोये, और हर रोज़ शारीरिक व्यायाम करें, पेट में कबज़ और गैस आदि की समस्या ना रहने दे | हर शनिवार की सुबह शिवलिंग पर जल अरपित करें | हर रोज़ सुबह और शाम गायत्री मन्त्र का ज़्यादा से ज़्यादा जप करे | रात को भारी भोजन ना करें, और ना ही देर तक टी वी या इन्ट्रनैट आदि से जुड़े रहें, और समय से सो जाये | खाने में सातविक भोजन शामिल करें, और गहरे रंग कके वस्त्र कम से कम पहने | अपने विचारो को शुद्ध रखे और महीने की हर अशटमी के दिन व्रत करे और कन्यायो में बेसन की मिठाई बान्टे | अपनी ज़िन्दगी के महत्वपूर्ण फ़ैसले अपने माता पिता और गुरु की अनुमति से लें | यदि राहु की महादशा या दशा के कारण बुरे फ़ल मिल रहे हो तो शमशान भुमी के पास पीपल के पेड़ लगाये, और शमशान भुमी के पास से जल लेकर आये और उसको घर पर रखे किसी बोतल में |

राहु कुण्डली के नवम भाव में
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कुण्डली का नवम भाव जो कि धर्मस्थान है, घर कि बुज़ुर्गो से सम्बन्धित है, लंबी दूरी की यात्रायो से सम्बन्धित है, दान - पुण्य से सम्बन्धित है | और जब राहु इस भाव में विराजता है और इस भाव से लोगो को आकर्षित करने की कोशिश करता है, तो ऐसे मे जातक विदेश में सफ़लता प्राप्त कर सकता है, अध्यापक के रूप में प्रसिद्ध हो सकता है, लेखन के कार्य, आडिटर के कार्य, उच्च शिक्षा से सम्बन्धित कार्य, किसी कालेज या युनिवर्सिटी के संचालक के रूप में भी प्रसिध हो सकता है | इनके इलावा ऐसे जातक गणित आदि विश्यो के भी माहिर होते हैं, शेयर मारकिट, धन के निवेशक, और कम्पनी के एच आर डिपारटमेन्ट में भी होते हैं |

और यदि इस भाव में राहु बुरे फ़ल दे रहा हो तो जातक का प्रारंभिक जीवन कश्ट से गुज़रता है | शिक्षा प्राप्ति में अवरोध आते हैं | ऐसे में जातक को गुरु शरण में रहना चाहिये, ब्रहसपति के उपाये करने चाहिये | पेट में कफ़ या गर्मी की शिकायत हो तो इस समस्या को दूर करना चाहिये | रोज़ाना सुर्य को जल देना चाहिये | नीले और हरे रंग के वस्त्रो का कम प्रयोग करना चाहिये | उचित शारीरिक व्यायाम और खेल - कूद से शारीरिक बल बढाना चाहिये जिस से सही से शारीरिक विकास हो | यदि सेहत समस्या है तो खास कर पेट से सम्बन्धित तो रोज़ाना सुबह खाली पेट गुनगुने पानी में शक्कर और निम्बु का रस मिला कर पीना चाहिये, जिस से कबज़ और गैस आदि की समस्या दूर हो | दाल चीनी, हीन्ग और मुलैठी का नियमित सेवन करना चाहिये, जिससे शरीर में आलस्य की समस्या ना रहे | और महत्वपूर्ण फ़ैसले माता - पिता की सहिमती से ही लेने चाहिये | खास कर इन्ट्रनैट के माध्यम से दोसती में धोखा मिलता है, क्युकि राहु धर्मस्थान को हानी पहुंचा रहा होता है | तो ऐसे में विवाह सम्बन्धी फ़ैसला माता पिता की अनुमति से लेना चाहिये |

राहु कुण्डली के दसवे भाव में
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कुण्डली का दसवा स्थान कार्यशेत्र का होता है | ऐसे में राहु का दसम स्थान को प्राभावित करना नौकरी / कारोबार में दिक्कत देता है | जातक को बार बार नौकरी में स्थान परिवर्तन जैसी स्थिति का सामना करना पडता है | या फ़िर जातक को घर से दूर स्थान पर जाकर नौकरी करनी पडती है | राहु की इस स्थिति में अच्छे परिणाम मिलने पर जातक डाकटर, वकालत के कार्य, पुलिस विभाग के कार्य, रेलवे विभाग, ऐम्बुलैन्स चलाने के कार्य, या कोई सरकारी बस आदि चलाने के कार्य जातक को मिल सकते है | क्युकि जातक को एक स्थान पर बैठने के कार्य नहीं करने होते | जैसे रेल या बस एक जगह से दूसरी जगह लगातार चलते रहते हैं, तो ऐसा ही जातक का कार्य होता है | और अगर जातक ऐसे कार्य ना करे तो जातक को आये दिन नौकरी में दिक्कतो का सामना करना पडता है, और हर साल उसकी नौकरी के स्थान बदलते रहते हैं, क्युकि यही राहु की शर्त है कि जातक एक जगह ना रहे |

और इस स्थान पर राहु कि बुरे प्रभाव से बचने के लिये घर में सुर्य यन्त्र स्थापित करना चाहिये और नियमित सुर्य अराधना करनी चाहिये | रविवार के दिन पानी में गुड़ प्रवाहित करना चाहिये | कार्यशेत्र में घोड़े की तसवीर लगानी चाहिये | और घोड़े को शनिवार के दिन चने खिलाने चाहिये | रविवार के दिन मूली का दान करना चाहिये | शनिवार के दिन मिट्टी के बरतन में सरसो का तेल भर कर ढक्कन लगाकर उसको नदी के किनारे दबा देना चाहिये | आटे की गोलियां बना कर नियमित चीटियो को देनी चाहिये | गुरुवार के दिन चने की दाल जल प्रवाह करनी चाहिये | हमेशा अपने साथ चान्दी का चोकोर टुकडा रखे | हमेशा अपने पिता का सम्मान करे | और अपने कार्यशेत्र पर भी अन्य अधिकारीयो से भी अच्छा व्यवहार करें |

राहु कुण्डली के गयाहरवे भाव में
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और कुण्डली का यह भाव बहुत महत्वपूर्ण है, क्युकि यह भाव लाभ का है , बड़े भाई बहन का है, खुशियो का है, ज़िन्दगी की बडी खवाहिशो का और उनके पूरे होने का है | यह भाव सामाजिक दायरे का है कि आप अपनी ज़िन्दगी की ज़रुरतो को पूरा करने के लिये किन लोगो का साथ ले रहे हैं | यह भाव सिर्फ़ बड़े भाई बहन का ही नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिये है जो आपसे बडा है, चाहे समाजिक रूप से चाहे आर्थिक रूप से | और जब इस स्थान पर राहु विराज जाये, तो आपके वो लोग जिन से भी आप जुडे हुये है, उमीदे लगाये बैठे हैं कि किसी समय में वो आपके काम आयेंगे, वो ही आपसे कटने लग जाते हैं | और इस का सब से बडा कारण खुद आप ही होते हो | क्युकि आपके 5th भाव में केतु है इस लिये आप क्रिएटिव नहीं होते, आप समय के साथ नहीं चलते, इस लिये हर कोई आपसे कटने लग जाता है | जैसे कि आपका कोई दोसत हो, कोई रिश्तेदार हो वो आपसे काफ़ी समय बाद मिले और आपकी जीवन शैली को देख कर कहे कि आप 2 साल पहले भी ऐसे थे और आज भी ऐसे हैं, 2 साल पहले भी आपका घर ऐसा था और आज भी कोई बदलाव नहीं | और क्युकि हर कोई बदलाव चाहता है, और व आपको वैसे ही हर बार देख कर आपसे कटने लग जाते हैं | और क्युकि आपमे कुछ नयापन नहीं है इसलिये आपके बास, आपके साथी, आपके दोस्त, जो भी आपका सामाजिक दायरा है जिनसे आओप जुडना चाहते हैं लेकिन वो आपसे कटने लगते हैं | तो ऐसे में अब लोग आपको पसंद नहीं करेंगे, आपके कार्य को पसन्द नहीं करेंगे तो आपके पास धन आएगा कहाँ से |

 इस स्थिति में राहु के प्रभाव से बचने के लिये अपने जीवन को नियमित तरीके से जीना चाहिये | घर में चीज़ो को नियमित तरीके से रखना चाहिये | घर में आने वाले खुशी के मौके जैसे बच्चों के जन्मदिन, दिन त्योहार, और अन्य छोटी छोटी खुशियो को मनाना चाहिये और सखे सम्बन्धियो से भी खुशिया सान्झी करनी चाहिये | ऐसा करने से आपकी छोटी खुशिया बडी खुशिया लेकर आती हैं | बच्चो के परिक्षा के उनके अच्छे परिणाम आने पर उनकी हौसला अफ़ज़ाई करनी चाहिये | जब भी मौका मिले पूरे परिवार को एक साथ बाहर खाने पर जाना चाहिये | और साल में एक बार पूरे परिवार के साथ धर्मस्थान पर जाना चाहिये और अच्छे जीवन के लिये आशिर्वाद प्राप्त करना चाहिये | अपने से बड़े अधिकारियो को अपनी खुशियो में शामिल करना चाहिये, और उनके साथ अच्छे सम्बन्ध रखने चाहिये | हर साल घर पर धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करना चाहिये, और सभी सम्बन्धियो को आमंत्रित करना चाहिये | और घर का सोना ( gold ) कभी भी नहीं बेचना चाहिये और ना ही गिरवी रखना चाहिये | घर में कबाड़, जंग लगा लोहा, ना पहनने वाले कपड़े और कोई भी फ़ालतु सामान नहीं रखना चाहिये | ऐसा करने से किये गये कार्यो के अच्छे परिणाम मिलने लगेंगे और बेवझा धन की हानी रुकेगी | और जब लोग आपके साह जुडने लगेगे तो आपकी सामाजिक और आर्थिक दोनो तरह की समस्या दूर होगी और आप निश्चित रूप से तरकी करेंगे |


राहु कुण्डली के बारवे भाव में
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कुण्डली का बारवा भाव जो कि शयन सुख, विदेश और ध्यान आदि से सम्बन्धित है | इस भाव में राहु के होने से जातक के शयन सुख में कमी होती है, रात को बुरे सपने आते हैं, विवाहिक जीवन के सुख में भी कमी होती है | और जब राहु इस भाव से सम्बन्धित चीज़ो से लोगो को आकर्षित करता है, तो ऐसे मे जातक मैडीकल फ़ीलड में जा सकता है, जातक डाकटरी की पढाई भी कर सकता है, जिस से राहु की ये शर्त पूरी होती है कि जातक होसपिटल में समय बिताये | अगर ऐसा ना हो तो आये दिन जातक को किसी ना किसी रूप में होसपिटल जाना पडता है, कभी घर के सदस्य के लिये तो कभी किसी रिश्तेदार के लिये | या फ़िर जातक पर झूठे इलज़ाम लगते रहते हैं, जिस से जातक को समाज में मान हानि का सामना करना पडता है | यदि बुध अच्छा हो तो जातक को विदेश में सफ़लता मिल सकती है, जातक घर से दूर रह कर अच्छा और सुखी जीवन जी पाता है | जातक बैकराउड परफ़ारमर बन सकता है, जैसे पलेबैक सिन्गर, कोई गीतकार, किसी कम्पनी के लिये इनवैसटर, कोई भी ऐसा रोल करैकटर जिस से वो लोगो से सीधे ना जुड़े, बल्कि लोग उस से टी वी पर ही देखें, जैसे कोई अदाकार, कोई प्रोडिउसर और गलैमर दुनिया से जुड़े हर तरह के कार्य में जातज अपना भाग्य आज़मा सकता है |

और यदि इस भाव में राहु बुरे फ़ल दे रहा हो, तो ज़्यादातर जातक को मान हानी का ही सामना करना पडता है | ऐसे में खुद को अध्यातम की तरफ़ ले कर जाना चाहिये | क्युकि आप ही देखें जो भी अदाकार हैं सितारे हैं, योग और फ़िटनेस उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है | तभी वो एक अदाकार के रूप में लोगो को लुभा पाते हैं , क्युकि वो दिन का ज़्यादातर समय अपनी शारीरिकता को देते हैं | इस लिये हर रोज़ योग और अध्यातम को अपने जीवन का हिस्सा बनाना चाहिये, जिस से राहु की नकारात्मक उर्जा दूर हो, और आपमे सकारात्मक उर्जा का संचार हो जिस से लोग आपकी अदाकारी को, आपकी काबीलियत को, आपकी आर्टिसट ऐबिलिटी को पसंद करें, और आप लोगो के दिल में जगह बना पाये | अदाकारी ना सही, लेकिन इन सब को जीवन का हिस्से बनाने से आपको समाज में मान हानि का सामना तो बिल्कुल नहीं करना पडेगा | औए सबसे ज़रूरी उपाय के तौर पर इस बात को ज़रुर अपनाये, कि चाहे आप ज़िन्दगी में कुछ भी बनना चाहते हैं, किसी भी करीयर में जाना चाहते हैं, गुरु ज़रुर बनाये, गुरु के सानिधय में रहे, क्युकि जितने भी बड़े बड़े व्यक्ति रहे हैं या दुनिया में हैं, सब में गुरु को जीवन में महत्वपूर्ण स्थान दिया है, महान व्यक्ति बनने से पहले वो एक अच्छे शिश्य बने हैं | क्युकि गुरु ही जीवन में जातक का मार्गदर्शन करते हैं, जिस से जातक अपने जीवन को सफ़ल बना पाता है | बाकि सबसे बड़े उपाये जातक के खुद के घर होते हैं, खुद के कर्म से होते हैं |

राहू का विशेष रहस्य

राहू का विशेष रहस्य

राहू को एक छाया ग्रह के रूप में स्वींकार किया गया है। छाया का भाव है कि इस ग्रह के पास अपना कोई प्रकाश नहीं है। यह ग्रह प्रकाशहीन है, अतः इनमें भी शनि की तरह प्रकाशहीनता का दोष है। इसी आधार पर राहू के गुणों में शनि के अनेक गुण समाहित है। इसलिए ज्योतिष शास्त्र में राहू को भी शनि की तरह धूर्त, शानि की भांति लंबे आकार वाला, रोगकरक, बदला लेने वाला, अभाव प्रदान करने वाला और प्रत्येक कार्य में विलंब करने वाला ग्रह माना गया है। यद्यपि राहु में अपना एक विशिष्ट गुण भी है, जो शनि को प्राप्त नही है। शानि अपना प्रभाव धीरे-धीरे प्रदान करता है, जबकि राहू किसी भी घटना को अचानक घटित करता है, अपना प्रभाव अनायास दे देता है। शनि की तरह राहू भी स्नायु तन्त्र पर अपना प्रभाव रखता है। अतः शनि की तरह स्नायु तंत्र संबन्धी रोगों के पीछे भी राहु का स्पष्ट हाथ देखा जाता है। .....इसलिए किसी व्यक्ति की जन्मकुंडली में लग्न, लग्नेश, चंद्र, चंद्र लग्नेश, सूर्य, लग्नेश अथवा सूर्य लग्नेश पर राहू अथवा शनि का प्रभाव हो तो ऐसे व्यक्ति को कम आयु में ही स्नायु विकार ग्रस्त हो जाते है। यदि यह दोष किसी ब्राह्यण जो, जो मद्यपान करता हो अथवा क्षत्रीय की जन्मकुंडली में हो तो रोग की अधिकता अधिक रहती है क्योंकि सूर्य, चन्द्र, गुरू व मगंल सभी शनि व राहू के शत्रु है। ये ग्रह उच्च जाति के है अर्थात् शूद्र नही है। इसी प्रकार राहू के प्रभाव मे ग्रह होने के कारण जन्मकुंडली में इसका प्रभाव यदि छठे अथवा आठवें भावों के स्वामी पर हो, साथ ही द्वितीय भाव अथवा उसके स्वामी पर हो तो वह व्यक्ति अपना जीवन अभावों में ही गुजारता है। जीवन में वह धन संचय नही कर पाता, क्योंकि ये दोनों ही भाव अभाव के है तथा द्वितीय भाव धन का है।
राहू एकाएक असर करने वाला, अचानक फल देने वाला ग्रह है। अतः जन्मकुंडली में राहू यदि धन द्योतक भाव अर्थात् लग्न, द्वितीय, पंचम, नवम अथवा एकादश भाव पर प्रभाव हो अर्थात् राहू के इस योग से व्यक्ति को लाटरी, सट्टा आदि से लाभ होता रहता है। जिन लोगों की जन्मकुंडली में यह योग होता है तो वह व्यवसाय करें अथवा नौकरी, परंतु वे ऐसे स्थान पर ही होते है कि उन्हें जब जब धन प्राप्त होता रहता है।
मेरे अनुभव में राहू के संबन्ध में बात ओर भी आयी है कि अगर किसी जन्मकुंडली में राहू के ऊपर किसी विशेष योग यथा गजकेसरी, लक्ष्मीनरायण अथवा किसी अन्य प्रकार के शुभ योग अथवा राजयोग का प्रभाव हो तो ऐसा राहू अपनी दशा अतंरदशा के दौरान जातक को अवश्य ही उस योग के फल प्रदान कराता है। इसी प्रकार यदि राहू किसी अशुभ योग के साथ अथवा अष्टमेश अथवा द्वाददेश आदि से युक्त अथवा दृष्ट होकर स्थित है, तो यह भी अपनी दशा अंन्र्तदशा के अनुसार अपना अशुभ फल देने में पीछे नही रहता।
राहू का गोचर फल
राहू अपने संक्रमण काल में अर्थात् राशि में प्रवेश से लगभग तीन महीने पहले ही अपना फल देने लगता है। राहू राशि के अंतिम भाग में अर्थात् 20 अंश से 30 अंश के मध्य अधिक फल देता है। प्रत्येक जन्म राशि में राहू का गोचर निम्न प्रकार से रहता है। यहां मतान्तर के मत को कोष्ठक में व्यक्त किया गया है तथा अतिरिक्त राहू जब भी गोचर में आद्र्रा, स्वाति व शतभिषा नक्षत्रों में भ्रमण करेगा तो उसके शुभ फल में वृद्धि हो जाती है। राहू गोचर में 3, 6 व 11 भाव में अत्यधिक शुभफल प्रदान करते है तथा अष्टम व द्वादश भाव में बहुत ही अशुभ फल देते है। राहू को सदैव ही रहस्यमय ग्रह के रूप में देखा गया है। शायद यही करण है कि राहू के सभी कार्य रहस्य से भरे रहते है। राहू सदैव अचानक ही फल देता है। इसीलिए राहू कब क्या फल देगा, इस संबन्ध में कोई कुछ नही कर सकता।
मेरे अनुभव में जब जन्मकुंडली में राहू की स्थिति अशुभ हो तो जातक राहू की दशा मे सदैव गलत कार्य ही करता है। उसके सभी कार्यो में कोई न कोई रहस्य छिपा रहता है। यदि शनि की स्थिति शुभ हो तो राहू की दशा में जातक ऐसे कार्य कर बैठता है कि जब राहू की दशा समाप्त होती है तो उसे विश्वास ही नही होता कि वह कार्य उसने किये है। जातक राहू के प्रभाव से ही शराब का सेवन करता है, चोरी करता है, रिश्वत लेता है अर्थात् राहू जो गलत कार्य करा दे, वह कम होता है। जातक यदि शराब नही पीता तो राहू के व्यवसाय भाव अथवा उसके स्वामी पर प्रभाव होने से वह शराब का कारोबार करता है।
जन्म राशि सेः-
जन्म राशि- रोग, कष्ट, ऋण वृद्धि, आर्थिक हानि।
द्वितीय स्थानः- आर्थिक हानि।
तृतीय स्थानः- आर्थिक लाभ व पराक्रम वृद्धि।
चतुर्थ स्थानः- शत्रु कष्ट व शत्रु वृद्धि।
पंचम स्थानः- संतान से कष्ट अथवा हानि व कार्य में मन न लगना।
षष्ठ स्थानः- आर्थिक लाभ व सुख वृद्धि।
सप्तम स्थानः- अनिष्ट, जीवन साथी कष्ट, पारवारिक कलह।
अष्टम् स्थानः- शारीरिक कष्ट व दुर्घटना भय, मृत्यु तुल्य कष्ट।
नवम स्थान:- धर्म से विमुख व आर्थिक हानि तथा प्रवास।
दशम स्थान:- शत्रुता, मानसिक कष्ट, कर्म क्षेत्र में हानि।
एकादश स्थान:- आर्थिक लााभ, सुख , कार्य सिद्धि।
द्वादश स्थानः- प्रत्येक क्षेत्र में हानि व अत्यधिक व्यय, अग्नि तथा दुर्घटना भय।
अशुभ राहू
समान्यतः राहू के जन्मकुंडली में पापी बनकर बैठने से जातक को स्नायु रोग, कोढ, मानसिक रोग, कमर से निचले हिस्से में पीडा, पागलपन, संधिवात, उदरवात तथा किसी भी रोग का दीर्घकाल तक ठीक न होना, अचानक घटित होने वाली घटनायें जैसे वाहन दुर्घटना, करंट लगना, जेल जाना, सर्पदंश, पदावनति, नौकरी छूटना, चुनाव में हारना, विषघात, फूड पोयजपिंग, बेहोश होना जैसे रोग अधिक होते है। राहू के अधिक पापी अथवा पीडित होने पर जातक अत्यधिक आलसी किस्म का तथा किसी भी कार्य को बहुत ही धीरे धीरे करने वाला बनता है।

नवममुखी रुद्राक्ष

नवममुखी रुद्राक्ष



9 मुखी रुद्राक्ष को नवदुर्गा का स्वरुप माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि यह रुद्राक्ष पहनने से नवदुर्गा की शक्तियाँ आपकी रक्षा करती है। नौमुखी रुद्राक्ष धारण करने से अनेक प्रकार के लाभ प्राप्त करके जीवन को सुखमय बनाया जा सकता है।

1- इस रुद्राक्ष के पहनने से आनन्द एवं मंगल का वातावरण परिवार में बना रहता है।

2- विपत्ति, दीनता, रोग आदि अनेक प्रकार की समस्याओं को आठमुखी रुद्राक्ष धारण करके दूर किया जा सकता है।

3- जो लोग नौकरी में अत्यधिक श्रम करते है, उसके बावजूद भी उनकी पदोन्नति होते-होते रुक जाती है। ऐसे लोगों को नौमुखी रुद्राक्ष पहनने से उनके करियर व नौकरी में पदोन्नति होने की सम्भावना बढ़ जाती है।

4- जो छात्र अपने कठिन परिश्रम के बल पर परीक्षा उत्तीर्ण करके साक्षात्कार देते है, किन्तु उन्हें सफलता नहीं मिलती है। ऐसे छात्र नौमुखी रुद्राक्ष धारण करके सफलता अर्जित कर सकते है।

5- चिड़चिड़े व क्रोधी स्वभाव वाली महिलाओं को नौमुखी रुद्राक्ष पहनने से मन शान्त रहता है।

6- जो बच्चे स्वभाव से जिद्दी, गुस्सैल, शरारती आदि है। उन्हें नौमुखी रुद्राक्ष चाँदी में जड़वाकर लाल धागे में गले में पहनाने से सकारात्मक परिणाम सामने आते है।

7- केतु ग्रह से सम्बन्धित दोषों का शमन करने के लिए नौमुखी रुद्राक्ष धारण अत्यन्त लाभकारी सिद्ध होता है।

धारण विधिः-किसी भी मास की शुक्ल पक्ष त्रयोदशी से पूर्णमासी तक लगातार तीन दिन तक गंगाजल, केसर, बेलपत्र आदि से निम्न मन्त्र- ''ऊँ ऐं हीं श्रीं क्लीं चामुण्डादैत्यै नमः'' से रुद्राक्ष को जलाभिषेक करना चाहिए। फिर इसी मन्त्र को पढ़ते हुये चमेली का तेल रूद्राक्ष में लगाना चाहिए। तत्पश्चात् प्रार्थना करने के बाद निम्न मन्त्र -''ऊँ ऐं हीं श्रीं क्लीं चामुण्डा देत्यै नमः'' से अधिक से अधिक 108 बार और कम से कम नौ बार हवन करना चाहिए। तत्पश्चात् अग्नि की नौ बार परिक्रमा करके नौमुखी रुद्राक्ष को धारण करना चाहिए।


अपना हाथ जन्म तारीख को बताता है

कभी कभी किसी कारणवश जन्म तारीख और दिन माह वार आदि का पता नही होता है,कितनी ही कोशिशि की जावे लेकिन जन्म तारीख का पता नही चल पाता है,जातक को सिवाय भटकने के और कुछ नही प्राप्त होता है,किसी ज्योतिषी से अगर अपनी जन्म तारीख निकलवायी भी जावे तो वह क्या कहेगा,इसका भी पता नही होता है,इस कारण के निवारण के लिये आपको कहीं और जाने की जरूरत नही है,किसी भी दिन उजाले में बैठकर एक सूक्षम दर्शी सीसा लेकर बैठ जावें,और अपने दोनो हाथों बताये गये नियमों के अनुसार देखना चालू कर दें,साथ में एक पेन या पैंसिल और कागज भी रख लें,तो देखें कि किस प्रकार से अपना हाथ जन्म तारीख को बताता है।
अपनी वर्तमान की आयु का निर्धारण करें
हथेली मे चार उंगली और एक अगूंठा होता है,अंगूठे के नीचे शुक्र पर्वत,फ़िर पहली उंगली तर्जनी उंगली की तरफ़ जाने पर अंगूठे और तर्जनी के बीच की जगह को मंगल पर्वत,तर्जनी के नीचे को गुरु पर्वत और बीच वाली उंगली के नीचे जिसे मध्यमा कहते है,शनि पर्वत,और बीच वाली उंगले के बाद वाली रिंग फ़िंगर या अनामिका के नीचे सूर्य पर्वत,अनामिका के बाद सबसे छोटी उंगली को कनिष्ठा कहते हैं,इसके नीचे बुध पर्वत का स्थान दिया गया है,इन्ही पांच पर्वतों का आयु निर्धारण के लिये मुख्य स्थान माना जाता है,उंगलियों की जड से जो रेखायें ऊपर की ओर जाती है,जो रेखायें खडी होती है,उनके द्वारा ही आयु निर्धारण किया जाता है,गुरु पर्वत से तर्जनी उंगली की जड से ऊपर की ओर जाने वाली रेखायें जो कटी नही हों,बीचवाली उंगली के नीचे से जो शनि पर्वत कहलाता है,से ऊपर की ओर जाने वाली रेखायें,की गिनती करनी है,ध्यान रहे कि कोई रेखा कटी नही होनी चाहिये,शनि पर्वत के नीचे वाली रेखाओं को ढाई से और बृहस्पति पर्वत के नीचे से निकलने वाली रेखाओं को डेढ से,गुणा करें,फ़िर मंगल पर्वत के नीचे से ऊपर की ओर जाने वाली रेखाओं को जोड लें,इनका योगफ़ल ही वर्तमान उम्र होगी।
अपने जन्म का महिना और राशि को पता करने का नियम
अपने दोनो हाथों की तर्जनी उंगलियों के तीसरे पोर और दूसरे पोर में लम्बवत रेखाओं को २३ से गुणा करने पर जो संख्या आये,उसमें १२ का भाग देने पर जो संख्या शेष बचती है,वही जातक का जन्म का महिना और उसकी राशि होती है,महिना और राशि का पता करने के लिये इस प्रकार का वैदिक नियम अपनाया जा सकता है:-
१-बैशाख-मेष राशि
२.ज्येष्ठ-वृष राशि
३.आषाढ-मिथुन राशि
४.श्रावण-कर्क राशि
५.भाद्रपद-सिंह राशि
६.अश्विन-कन्या राशि
७.कार्तिक-तुला राशि
८.अगहन-वृश्चिक राशि
९.पौष-धनु राशि
१०.माघ-मकर राशि
११.फ़ाल्गुन-कुम्भ राशि
१२.चैत्र-मीन राशि
इस प्रकार से अगर भाग देने के बाद शेष १ बचता है तो बैसाख मास और मेष राशि मानी जाती है,और २ शेष बचने पर ज्येष्ठ मास और वृष राशि मानी जाती है।
हाथ में राशि का स्पष्ट निशान भी पाया जाता है
प्रकृति ने अपने द्वारा संसार के सभी प्राणियों की पहिचान के लिये अलग अलग नियम प्रतिपादित किये है,जिस प्रकार से जानवरों में अपनी अपनी प्रकृति के अनुसार उम्र की पहिचान की जाती है,उसी प्रकार मनुष्य के शरीर में दाहिने या बायें हाथ की अनामिका उंगली के नीचे के पोर में सूर्य पर्वत पर राशि का स्पष्ट निशान पाया जाता है। उस राशि के चिन्ह के अनुसार महिने का उपरोक्त तरीके से पता किया जा सकता है।
पक्ष और दिन का तथा रात के बारे में ज्ञान करना
वैदिक रीति के अनुसार एक माह के दो पक्ष होते है,किसी भी हिन्दू माह के शुरुआत में कृष्ण पक्ष शुरु होता है,और बीच से शुक्ल पक्ष शुरु होता है,व्यक्ति के जन्म के पक्ष को जानने के लिये दोनों हाथों के अंगूठों के बीच के अंगूठे के विभाजित करने वाली रेखा को देखिये,दाहिने हाथ के अंगूठे के बीच की रेखा को देखने पर अगर वह दो रेखायें एक जौ का निशान बनाती है,तो जन्म शुक्ल पक्ष का जानना चाहिये,और जन्म दिन का माना जाता है,इसी प्रकार अगर दाहिने हाथ में केवल एक ही रेखा हो,और बायें हाथ में अगर जौ का निशान हो तो जन्म शुक्ल पक्ष का और रात का जन्म होता है,अगर दाहिने और बायें दोनो हाथों के अंगूठों में ही जौ का निशान हो तो जन्म कृष्ण पक्ष रात का मानना चाहिये,साधारणत: दाहिने हाथ में जौ का निशान शुक्ल पक्ष और बायें हाथ में जौ का निशान कृष्ण पक्ष का जन्म बताता है।
जन्म तारीख की गणना
मध्यमा उंगली के दूसरे पोर में तथा तीसरे पोर में जितनी भी लम्बी रेखायें हों,उन सबको मिलाकर जोड लें,और उस जोड में ३२ और मिला लें,फ़िर ५ का गुणा कर लें,और गुणनफ़ल में १५ का भाग देने जो संख्या शेष बचे वही जन्म तारीख होती है। दूसरा नियम है कि अंगूठे के नीचे शुक्र क्षेत्र कहा जाता है,इस क्षेत्र में खडी रेखाओं को गुना जाता है,जो रेखायें आडी रेखाओं के द्वारा काटी गयीं हो,उनको नही गिनना चाहिये,इन्हे ६ से गुणा करने पर और १५ से भाग देने पर शेष मिली संख्या ही 

राशि के अनुसार आपने क्या-क्या गुण होने चाहिए और क्या स्वभाव होना चाहिए

 आपकी राशि के अनुसार आपने क्या-क्या गुण होने चाहिए और क्या स्वभाव होना चाहिए
मेष राशि: मेष राशि के जातक दिल के साफ,  ईमानदार मेहनती जुबान से कड़वे स्वतंत्र प्रिय क्रोधी परिपक्वता देर से आती है
 वृषभ राशि के जातक भावुक कलाकार सहृदय होते हैं परंतु आलस और अहंकार इनके मार्ग की रुकावट बनते हैं
मिथुन राशि के जातक   बुद्धिमान चतुर जिज्ञासु कोमल हृदय वाले मगर निर्णय गलत लेते हैं
 कर्क राशि वाले जातक गुणवान काल्पनिक दयालु प्रेमी मगर गलत संगत का चुनाव करते हैं
 सिंह राशि के जातक मेहनती अच्छा स्वभाव स्वतंत्र प्रिय विनोदी उद्धार रचनात्मक परंतु अहंकार वह स्वयं को सही समझना इनको परेशानी में डालता है
कन्या राशि के जातक समझदार व्यवहारिक मिलनसार वफादार डरपोक निर्णय सही ना लेना चिड़चिड़ापन उनकी कमजोरी होता है
तुला राशि के जातक भावुक आकर्षक सौंदर्य प्रेमी मित्र अति आत्मविश्वासी दूसरों की सहायता करना परंतु दूसरों की ना सुनना इनकी कमजोरी होता है
  वृश्चिक राशि के जातक होशियार समझदार सच्चे मित्र भावुक जिद्दी बदला लेने की प्रवृत्ति और जल्दबाजी इन्हें नुकसान पहुंचाती है
 धनु राशि के जातक बुद्धिमान उद्धार प्रेमी समझदार आदर्शवादी होते हैं  मगर व्यवहार कुशल नहीं होते और अति आत्मविश्वास इनको परेशानी में डालता है
मकर राशि के जातक    दूरदर्शी अनुशासनप्रिय चिड़चिड़ापन गंभीर जुबान के तेज तर्रार सब को नीचा दिखाना इनकी कमजोरी होता है
 कुंभ राशि के जातक न्यायप्रिय मेहनती होशियार एकांतप्रिय जुबान के कड़वे मुश्किल से ही इनकी बनती है
 मीन राशि के जातक दयालु कलात्मक   एकांतप्रिय बुद्धिमान वास्तविकता से कोई नाता नहीं होता इनकी सबसे बड़ी कमजोरी होता है

मकर संक्रांति दान, उपाय और फल पढ़ें राशि अनुसार

*ज्योतिष शास्त्र*


*मकर संक्रांति दान, उपाय और फल पढ़ें राशि अनुसार...*

*14 जनवरी को मकर संक्रांति, क्या जीवन में लाएगी शांति?*

*मकर संक्रांति के राशिनुसार दान और उनका फल*


*14 जनवरी को मकर संक्रांति है। आइए जानते हैं इस दिन अपनी राशि के अनुसार क्या दान करें कि हर तरह से शुभता मिले।*

*1. मेष-* जल में पीले पुष्प, हल्दी, तिल मिलाकर अर्घ्य दें। तिल-गुड़ का दान दें। उच्च पद की प्राप्ति होगी।
*2. वृषभ-* जल में सफेद चंदन, दुग्ध, श्वेत पुष्प, तिल डालकर सूर्य को अर्घ्य दें। बड़ी जवाबदारी मिलने तथा महत्वपूर्ण योजनाएं प्रारंभ होने के योग बनेगें।
*3. मिथुन-* जल में तिल, दूर्वा तथा पुष्प मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दें। गाय को हरा चारा दें। मूंग की दाल की खिचड़ी दान दें। ऐश्वर्य की प्राप्ति होगी।
*4. कर्क-* जल में दुग्ध, चावल, तिल मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दें। चावल-मिश्री-तिल का दान दें। कलह-संघर्ष, व्यवधानों पर विराम लगेगा।
*5. सिंह-* जल में कुमकुम तथा रक्त पुष्प, तिल डालकर सूर्य को अर्घ्य दें। तिल, गुड़, गेहूं, सोना दान दें। किसी बड़ी उपलब्धि की प्राप्ति होगी।
*6. कन्या-* जल में तिल, दूर्वा, पुष्प डालकर सूर्य को अर्घ्य दें। मूंग की दाल की खिचड़ी दान दें। गाय को चारा दें। शुभ समाचार मिलेगा।
*7. तुला-* सफेद चंदन, दुग्ध, चावल, तिल मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दें। चावल का दान दें। व्यवसाय में बाहरी संबंधों से लाभ तथा शत्रु अनुकूल होंगे।
*8. वृश्चिक-* जल में कुमकुम, रक्तपुष्प तथा तिल मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दें। गुड़ का दान दें। विदेशी कार्यों से लाभ तथा विदेश यात्रा होगी।
*9. धनु-* जल में हल्दी, केसर, पीले पुष्प तथा मिल मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दें। चारों-ओर विजय होगी।
*10. मकर-* जल में काले-नीले पुष्प, तिल मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दें। गरीब-अपंगों को भोजन दान दें। अधिकार प्राप्ति होगी।
*11. कुंभ-* जल में नीले-काले पुष्प, काले उड़द, सरसों का तेल-तिल मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दें। तेल-तिल का दान दें। विरोधी परास्त होंगे। भेंट मिलेगी।
*12 . मीन-* हल्दी, केसर, पीत पुष्प, तिल मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दें। सरसों, केसर का दान दें। सम्मान, यश बढ़ेगा।