Sunday, November 19, 2017

बातें बिल्व वृक्ष की-

बातें बिल्व वृक्ष की-
1. बिल्व वृक्ष के आसपास सांप नहीं आते ।
2. अगर किसी की शव यात्रा बिल्व वृक्ष की छाया से होकर
गुजरे तो उसका मोक्ष हो जाता है ।
3. वायुमंडल में व्याप्त अशुध्दियों को सोखने की क्षमता
सबसे ज्यादा बिल्व वृक्ष में होती है ।
4. चार पांच छः या सात पत्तो वाले बिल्व पत्रक पाने वाला
परम भाग्यशाली और शिव को अर्पण करने से अनंत गुना फल
मिलता है ।
5. बेल वृक्ष को काटने से वंश का नाश होता है। और बेल
वृक्ष लगाने से वंश की वृद्धि होती है।
6. सुबह शाम बेल वृक्ष के दर्शन मात्र से पापो का नाश होता
है।
7. बेल वृक्ष को सींचने से पितर तृप्त होते है।
8. बेल वृक्ष और सफ़ेद आक् को जोड़े से लगाने पर अटूट
लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।
9. बेल पत्र और ताम्र धातु के एक विशेष प्रयोग से ऋषि मुनि
स्वर्ण धातु का उत्पादन करते थे ।
10. जीवन में सिर्फ एक बार और वो भी यदि भूल से भी
शिवलिंग पर बेल पत्र चढ़ा दिया हो तो भी उसके सारे पाप मुक्त
हो जाते है ।
11. बेल वृक्ष का रोपण, पोषण और संवर्धन करने से महादेव
से साक्षात्कार करने का अवश्य लाभ मिलता है।
कृपया बिल्व पत्र का पेड़ जरूर लगाये । बिल्व पत्र के लिए पेड़
को क्षति न पहुचाएं
शिवजी की पूजा में ध्यान रखने योग्य बात
शिवपुराण के अनुसार भगवान शिव को कौन सी चीज़ चढाने से
मिलता है क्या फल
किसी भी देवी-देवता का पूजन करते वक़्त उनको अनेक चीज़ें
अर्पित की जाती है। प्रायः भगवन को अर्पित की जाने वाली हर
चीज़ का फल अलग होता है। शिव पुराण में इस बात का वर्णन
मिलता है की भगवन शिव को अर्पित करने वाली अलग-अलग
चीज़ों का क्या फल होता है।
शिवपुराण के अनुसार जानिए कौन सा अनाज भगवान शिव को
चढ़ाने से क्या फल मिलता है:
1. भगवान शिव को चावल चढ़ाने से धन की प्राप्ति होती है।
2. तिल चढ़ाने से पापों का नाश हो जाता है।
3. जौ अर्पित करने से सुख में वृद्धि होती है।
4. गेहूं चढ़ाने से संतान वृद्धि होती है।यह सभी अन्न भगवान
को अर्पण करने के बाद गरीबों में वितरीत कर देना चाहिए।
शिवपुराण के अनुसार जानिए भगवान शिव को कौन सा रस
(द्रव्य) चढ़ाने से उसका क्या फल मिलता है
1. ज्वर (बुखार) होने पर भगवान शिव को जलधारा चढ़ाने से
शीघ्र लाभ मिलता है। सुख व संतान की वृद्धि के लिए भी
जलधारा द्वारा शिव की पूजा उत्तम बताई गई है।
2. नपुंसक व्यक्ति अगर शुद्ध घी से भगवान शिव का अभिषेक
करे, ब्राह्मणों को भोजन कराए तथा सोमवार का व्रत करे तो
उसकी समस्या का निदान संभव है।
3. तेज दिमाग के लिए शक्कर मिश्रित दूध भगवान शिव को
चढ़ाएं।
4. सुगंधित तेल से भगवान शिव का अभिषेक करने पर समृद्धि में
वृद्धि होती है।
5. शिवलिंग पर ईख (गन्ना) का रस चढ़ाया जाए तो सभी आनंदों
की प्राप्ति होती है।
6. शिव को गंगाजल चढ़ाने से भोग व मोक्ष दोनों की प्राप्ति
होती है।
7. मधु (शहद) से भगवान शिव का अभिषेक करने से राजयक्ष्मा
(टीबी) रोग में आराम मिलता है।
शिवपुराण के अनुसार जानिए भगवान शिव को कौन का फूल
चढ़ाया जाए तो उसका क्या फल मिलता है
1. लाल व सफेद आंकड़े के फूल से भगवान शिव का पूजन करने
पर भोग व मोक्ष की प्राप्ति होती है।
2. चमेली के फूल से पूजन करने पर वाहन सुख मिलता है।
3. अलसी के फूलों से शिव का पूजन करने से मनुष्य भगवान
विष्णु को प्रिय होता है।
4. शमी पत्रों (पत्तों) से पूजन करने पर मोक्ष प्राप्त होता है।
5. बेला के फूल से पूजन करने पर सुंदर व सुशील पत्नी मिलती
है।
6. जूही के फूल से शिव का पूजन करें तो घर में कभी अन्न की
कमी नहीं होती।
7. कनेर के फूलों से शिव पूजन करने से नए वस्त्र मिलते हैं।
8. हरसिंगार के फूलों से पूजन करने पर सुख-सम्पत्ति में वृद्धि
होती है।
9. धतूरे के फूल से पूजन करने पर भगवान शंकर सुयोग्य पुत्र
प्रदान करते हैं, जो कुल का नाम रोशनकरता है।
10. लाल डंठलवाला धतूरा पूजन में शुभ माना गया है।
11. दूर्वा से पूजन करने पर आयु बढ़ती ह
जय महादेव
जय महाकाल
ॐ नमः शिवाय

जन्म कुंडली में दुर्घटना होने के योग

जन्म कुंडली में दुर्घटना होने के योग
जन्म कुंडली में आठवाँ भाव अथवा अष्टमेश, मंगल तथा राहु से पीड़ित होने पर दुर्घटना होने के योग बनते हैं.

सारावली के अनुसार शनि, चंद्रमा और मंगल दूसरे, चतुर्थ व दसवें भाव में होने पर वाहन से गिरने पर बुरी दुर्घटना देते हैं.

जन्म कुंडली में सूर्य तथा मंगल चतुर्थ भाव में पापी ग्रहों से दृष्ट होने पर दुर्घटना के योग बनते हैं.

सूर्य दसवें भाव में और चतुर्थ भाव से मंगल की दृष्टि पड़ रही हो तब दुर्घटना होने के योग बनते हैं.

निर्बली लग्नेश और अष्टमेश की चतुर्थ भाव में युति हो रही हो तब वाहन से दुर्घटना होने की संभावना बनती है.

लग्नेश कमजोर हो और षष्ठेश, अष्टमेश व मंगल के साथ हो तब गंभीर दुर्घटना के योग बनते हैं.

जन्म कुंडली में लग्नेश कमजोर होकर अष्टमेश के साथ छठे भाव में राहु, केतु या शनि के साथ स्थित होता है तब गंभीर रुप से दुर्घटनाग्रस्त होने के योग बनते हैं.

जन्म कुंडली में आत्मकारक ग्रह पापी ग्रहों की युति में हो या पापकर्तरी में हो तब दुर्घटना होने की संभावना बनती है.
जन्म कुंडली का अष्टमेश सर्प द्रेष्काण में स्थित होने पर वाहन से दुर्घटना के योग बनते हैं.
जन्म कुंडली में यदि सूर्य तथा बृहस्पति पीड़ित अवस्था में स्थित हों और इन दोनो का ही संबंध त्रिक भाव के स्वामियों से बन रहा हो तब वाहन दुर्घटना अथवा हवाई दुर्घटना होने की संभावना बनती है.

जन्म कुंडली का चतुर्थ भाव तथा दशम भाव पीड़ित होने से व्यक्ति की गंभीर रुप से दुर्घटना होने की संभावना बनती है।

अल्पायु योग

अल्पायु योग-:

1. 1, 4, 5, 8 स्थानों का शनि लग्न में हो|
2. शुभग्रह 3, 6, 9 स्थानों में हो|
3. अष्टमेश पापग्रह होकर गुरु से दृष्ट हो|
4. चन्द्र, शनि और सूर्य आठवें भाव में हो|
5. लग्नेश निर्बल होकर पाप राशि में पड़ा हो|
6. दिन में जन्म हो और चन्द्रमा से आठवें स्थान पर पापग्रह हो|

7. दीघॉयु योग का अभाव हो|

अरिष्ट भंग योग

अरिष्ट भंग योग-:

वर्षलग्नेश पंचवर्गी में सबसे अधिक बलवान होकर एक, चार, पांच, सात, नौवें या दसवें भाव में हों, तो अरिष्टनाशक योग होता है|
ब्रहस्पति केंद्र (१, ४, ७, १०) या त्रिकोण (५, ९) में शुभग्रहों से द्रष्ट हो व उस पर पापग्रहों की दृष्टि न हो, तो अरिष्टनिवारक योग होता है|
चतुर्थ भाव अपने स्वामी के साथ या शुभग्रह के साथ अथवा उससे दृष्ट हो, तो भी अनिष्टनाशक योग होकर धन, दुःख और सम्मान कि वृद्धि करता है|

सप्तमेश लग्न में ब्रहस्पति के साथ हो और क्रूरग्रह उसे न देखते हों, तो ऐसा योग अरिष्टनिवारक योग कहलाता है|

नवम घर का स्वामी तथा दुसरे घर का स्वामी बलवान होकर लग्न में हों तथा उन पर पापग्रहों की दृष्टि न हो, तो जातक राज्य में सम्मान प्राप्त करता है|

तीसरे, छठें, तथा ग्यारहवें स्थानों में पापग्रह एवं केन्द्र तथा त्रिकोण में शुभग्रह होते हैं, तो अरिष्टनिवारक योग बनता है|

लग्नेश पूर्णबली होकर केन्द्र, त्रिकोण या ११, १२वें स्थान में हो, तो जातक की सभी इच्छाएं पूरी होती हैं|

उच्च राशि का स्वामी बलवान होकर वर्षेश हो तथा वह तीसरे व ग्यारहवें भाग में स्थित हो, तो अरिष्टनिवारक योग होता है|

सूर्य, ब्रहस्पति, तथा शुक्र परस्पर इत्थशाल योग करते हों, तो उस वर्ष जातक को नौकरी में प्रमोशन मिलता है|

शुक्र, बुध और चन्द्रमा अपनी मुधा में हों, तो जातक व्यापर से लाभ उठता है|
मंगल वर्षेश होकर मित्र की रार्शी में हो और घर में पड़े ग्रह से मुत्थशिल योग करता है, तो उस वर्ष जातक को उच्च वाहन मिलता है|

धन-सुख योग


धन-सुख योग-:

दिन मे जन्म लेने वाले जातक का चन्द्रमा अपने नवांश मे हो तथा उसे गुरु देखता हो, तो धन-सुख योग होता है|
रात मे जन्म हो, चंद्रमा को शुक्र देखता हो, तो धन-प्राप्ति होती है|
भाग्य के स्वामी का लाभ के स्वामी के साथ योग हो|
चौथे घर का मालिक भाग्येश के साथ बैठा हो|
भाग्येश और पंचमेश का योग हो|
भाग्येश और द्वितीयेश का योग हो|
दशमेश और लाभेश साथ हों|
दशमेश और चतुर्थेश २, ४, ५, ९ घर मे साथ बैठे हो|
धनेश और पंचमेश का योग हो|
लग्न का स्वामी चौथे घर के साथ बैठे हो|
लाभेश और चतुर्थेश का योग हो|
लाभेश और धनेश का योग हो|
लाभेश और लग्नेश का योग हो|
लग्नेश और धनेश का योग हो|
लग्न का स्वामी पांचवें स्थान के स्वामी के साथ हो|

ससुराल से धन-प्राप्ति के योग

ससुराल से धन-प्राप्ति के योग:-

1. सप्तमेश और द्वतीयेश एक साथ हों और उन पर शुक्र की दृष्टि हो|
2. चौथे घर का स्वमी सातवें घर में हो, शुक्र चौथे स्थान पर हो, तो ससुराल से धन मिलता है|
3. सप्तमेश नवमेश शुक्र द्वारा देखे जाते हों|
4. बलवान धनेश स्थान पर बैठे शुक्र द्वारा देखा जाता हो|

जमींदारी योग

जमींदारी योग-:

1. चौथे घर का मालिक दशम मे तथा दशमेश चतुर्थ मे हो|
2. चतुर्थेश, २ या ११वें स्थान पर हो|
3. चतुर्थेश, दशमेश और चन्द्रमा बलवान हों तथा परस्पर मित्र हों|
4. पंचमेश लग्न मे हो|
5. सप्तमेश, नवमेश तथा एकादशेश लग्न मे हों|