Thursday, February 1, 2018

गुस्से का सम्बन्ध कुंडली के प्रथम भाव से

गुस्से का सम्बन्ध कुंडली के प्रथम भाव से अधिक है।। अगर कुंडली के प्रथम भाव मे समस्या हो तो व्यक्ति गुस्सेल होगा. उदाहरण के लिए नीच का शनि , ख़राब राहू या केतु व्यक्ति को जिद्दी और गुस्सेल बना देता है।।
इसके अलावा जब –जब नकारात्मक ग्रह महादशा, अन्तर्दशा मे आते है तो भी व्यक्ति कुछ समय के लिए गुस्सेल हो जाता है.
परन्तु इसे कन्ट्रोल करना चाहिए।।
ज्योतिषीय दृष्टि से देखा जाये तो क्रोध के मुख्य कारण मंगल, सूर्य, शनि, राहु तथा चंद्रमा होते हैं।
इनमें से यदि मंगल ग्रह सूर्य और चंद्रमा के समान व्यवहार कर सकता है, यदि जन्मकुंडली में सूर्य और चंद्रमा, मंगल ग्रह से संबंधित हो तो क्रोध व्यक्त करने में कामयाब हो जाता
मंगल ग्रह का शनि से युति गुस्से को नियंत्रित करने में असमर्थ होती है। यह अत्यधिक विघटन का भाव पैदा कर सकते हैं।
जिन व्यक्तियों का मंगल अच्छा नहीं होता है, उनमें क्रोध और आवेश की अधिकता रहती है। ऐसे व्यक्ति छोटी-छोटी बातों पर भी उबल पड़ते हैं।
अन्य व्यक्तियों द्वारा समझाने का प्रयास भी ऐसे व्यक्तियों के क्रोध के आगे बेकार हो जाता है। क्रोध और आवेश के कारण ऐसे लोगों का खून एकदम गर्म हो जाता है। लहू की गति blood pressure के अनुसार क्रोध का प्रभाव भी घटता-बढ़ता रहता है।
राहू के कारण जातक अपने आर्थिक वादे पूर्ण नहीं कर पाता है। इस कारण भी वह तनाव और मानसिक संत्रास का शिकार हो जाता
मंगल के साथ नीच चंद्रमा घरेलु शांति के लिए शुभ नहीं है. दूसरे घर (तीसरे और छठे घर के स्वामी) और मंगल / शनि के कारण जातक का स्वभाव अपने कैरियर में गंभीर समस्याओं का सामना कराता है।
वे सभी जातक जिनकी कुंडली मे मंगल राहु और शनि ज़्यादा प्रभावित होते है वो लोग ज़्यादा झगड़ा करते है ।
यदि मंगल के साथ राहु होगा तो ज़्यादा झगड़ा करते है ।
यदि कुंडली में शनि कमज़ोर होगा तो भी झगड़ा करते है ।
राहु शरीर मे गर्मी बढ़ाता है ।
यदि चंद्रमा लग्र में या तीसरे स्थान में मंगल, शनि या केतु के युत हो तो क्रोध के साथ चिडचिडापन देता है। वहीं यदि सूर्य मंगल के साथ योग बनाये तो अहंकार के साथ क्रोध का भाव आता है।
मंगल शनि की युति क्रोध जिद के रूप में व्यक्त होती है। राहु के लग्र, तीसरे अथवा द्वादश स्थान में होने पर काल्पनिक अहंकार के कारण अपने आप को बडा मानकर अंहकारी बनाता है जिससे क्रोध उत्पन्न हो सकता है

कर्ज से मुक्ति पाने के आसन उपाय

कर्ज से मुक्ति पाने के आसन उपाय
ऐसा क्यों होता है कि कभी-कभी कर्ज चुकने का नाम ही नहीं लेता?कर्ज शब्द का भाव है कि किसी से उधार कुछ धन लिया और बाद मे उस पर कुछ अतिरिक्त धन देकर मुलधन को वापस कर देना । ये सबसे बुरी बीमारी है और अगर एक साल ब्याज की किस्त किसी कारण वष नही दें पाया तो अगले वर्श उस ब्याज को मूलधन मे जोड दिया जाता है और इस प्रकार ब्याज के उपर ब्याज देना पडता है । इसी प्रकार हम हर रोज या हर माह जैसा निष्चित किया गया है उनके हिसाब के मुताबिक ब्याज व मुलधन नही दे सके तो एक दिन ऐसा आऐगा कि हम कर्ज से इतने दब जायेंगे कि पूरी जिन्दगी दबे रहेंगे न खाना अच्छा खा सकेंगे और बच्चो का सही ढंग से पालन पोशण कर पाएंगे । और एक दिन जब कर्ज से ज्यादा दब जायेगें और किसी भी स्थिति मे चुकता नही कर पाएगें तो हमे दिवालिया घोशित कर दिया जाएगा कोई भी आदमी आदर से नही देखेगा और उसे दुनियां के लोग बडी घृणा से देखते है । लोग उसे कुछ भी देना पसन्द नही करते है ।शास्त्रों में मंगलवार और बुधवार को कर्ज के लेन-देन के लिए निषेध किया है। मंगलवार को कर्ज लेने वाला जीवनभर कर्ज नहीं चुका पाता तथा उस व्यक्ति की संतान भी इस वजह परेशानियां उठाती हैं।जीवन में प्रत्येक व्यक्ति को कभी न कभी अपनी जरूरतों की पूर्ति के लिए कर्ज लेना ही पड़ता है। कई बार व्यक्ति कर्ज को जल्दी चुकाने की इच्छा रखता है, लेकिन कर्ज का अंत नहीं आता है। कर्ज के लेन-देन में वार का भी विशेष महत्व होता है।
यदि व्यक्ति को किसी कारणवश कर्ज लेना पड़े तो वार देखकर लेना हितकर रहेगा।
कर्ज को न बढने दो इसे रोज चुकाओ बिना नागा किए भजन सुमिरन करो ताकि ब्याज और मुलधन दोनो को चुका दिया जाए ।
‘‘करि रोज भजन तु भाई । कर्मो की करि लै लाई’’ ‘‘फसलॅ पहुंच जाय खलियान’’
रोज़मर्रा की जिंदगी और घर-गृहस्ती के कामों के लिए इंसान कमोबेश ऋण लेता रहता है| यह कर्ज तब तक भार नहीं लगता है, जब तक वह चुकता रहता है| लेकिन समस्या तब बढ़ जाती है, जब कर्ज लेकर कर्जा चुकाएं या कर्जे पर कर्जा बढ़ता चला जाए| ऐसा क्यों होता है और ज्योतिष की दृष्टी से इसके कारण निवारणों पर ध्यान दिया जाए तो यह पता चलता है कि इस तरह के कुछ योग होते हैं जिनमे कर्ज चुकने में ही नहीं आता है|
कर्ज और वार का संबंध
सोमवार सोमवार की अधिष्ठाता देवी पार्वती हैं। यह चर संज्ञक और शुभ वार है। इस वार को किसी भी प्रकार का कर्ज लेने-देने में हानि नहीं होती है।
मंगलवार मंगलवार के देवता कार्तिकेय हैं। यह उग्र एवं क्रूर वार है। इस वार को कर्ज लेना शास्त्रों में निषेध बताया गया है। इस दिन कर्ज लेने के बजाए पुराना कर्ज हो तो चुका देना चाहिए।
बुधवार बुधवार के देवता विष्णुहैं। यह मिश्र संज्ञक शुभ वार है, मगर ज्योतिष की भाषा में इसे नपुंसक वार माना गया है। यह गणेशजी का वार है। इस दिन कर्ज देने से बचना चाहिए।
गुरुवार गुरुवार के देवता ब्रह्माहैं। यह लघु संज्ञक शुभ वार है। गुरुवार को किसी को भी कर्ज नहीं देना चाहिए, लेकिन इस दिन कर्ज लेने से कर्ज जल्दी उतरता है।
शुक्रवार शुक्रवार के देवता इन्द्र हैं। यह मृदु संज्ञक और सौम्य वार है। कर्ज लेने-देने दोनों दृष्टि से अच्छा वार है।
शनिवार शनिवार के देवता काल हैं। यह दारुण संज्ञक क्रूर वार है। स्थिर कार्य करने के लिए ठीक है, परंतु कर्ज लेन-देने के लिए ठीक नहीं है। कर्ज विलंब से चुकता है।
रविवार रविवार के देवता शिव हैं। यह स्थिर संज्ञक और क्रूर वार है। रविवार को न तो कर्ज दें और न ही कर्ज लें।
कर्ज के पिंड से छुटकारा नहीं हो रहा हो तो प्रत्येक बुधवार को गणेशजी के सम्मुख तीन बार ‘ऋणहर्ता गणेश स्तोत्र’ का पाठ करें और यथाशक्ति पूजन करें।
कुंडली के कर्ज कारक योग:
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मंगल ग्रह को कर्ज का कारक ग्रह माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार मंगलवार को कर्ज लेना निषेध माना गया है। वहीं बुधवार को कर्ज देना अशुभ है क्योंकि बुधवार को दिया गया कर्ज कभी नही मिलता। मंगलवार को कर्ज लेने वाला जीवनभर कर्ज नहीं चुका पाता तथा उस व्यक्ति की संतान भी इस वजह परेशानियां उठाती हैं।जन्म कुंडली के छठे भाव से रोग, ऋण, शत्रु, ननिहाल पक्ष, दुर्घटना का अध्ययन किया जाता है। ऋणग्रस्तता के लिए इस भाव के आलावा दूसरा भाव जो धन का है, दशम-भाव जो कर्म व रोजगार का है, एकादश भाव जो आय का है एवं द्वादश भाव जो व्यय भाव है, का भी अध्ययन किया जाता है। इसके आलावा ऋण के लिए कुंडली में मौजूद कुछ योग जैसे सर्प दोष व वास्तु दोष भी इसके कारण बनते हैं। इस भाव के कारक ग्रह शनि व मंगल हैं।
दूसरे भाव का स्वामी बुध यदि गुरु के साथ अष्टम भाव में हो तो यह योग बनता है। जातक पिता के कमाए धन से आधा जीवन काटता है या फिर ऋण लेकर अपना जीवन यापन करता है। सूर्य लग्न में शनि के साथ हो तो जातक मुकदमों में उलझा रहता है और कर्ज लेकर जीवनयापन व मुकदमेबाजी करता रहता है।12 वें भाव का सूर्य व्ययों में वृद्धि कर व्यक्ति को ऋणी रखता है। अष्टम भाव का राहू दशम भाव के माध्यम से दूसरे भाव पर विष-वमन कर धन का नाश करता है और इंसान को ऋणी होने के लिए मजबूर कर देता है इनके आलावा कुछ और योग हैं जो व्यक्ति को ऋणग्रस्त बनाते हैं।
उपर बताएं पाप ग्रह अगर मंगल को देख रहे हों तो भी कर्जा होता है।
कुंडली में खराब फल देने वाले घरों (छठे, आठवें या बारहवें) घर में कर्क राशि के साथ हो तो व्यक्ति का कर्ज लंबे समय तक बना रहता है।
षष्ठेश पाप ग्रह हो व 8 वें या 12 वें भाव में स्थित हो तो व्यक्ति ऋणग्रस्त रहता है।
छठे भाव का स्वामी हीन-बली होकर पापकर्तरी में हो या पाप ग्रहों से देखा जा रहा हो।
अगर कुंडली में मंगल कमजोर हो यानि कम अंश का हो तो ऋण लेने की स्थिति बनती है।
अगर मंगल कुंडली में शनि, सूर्य या बुध आदि पापग्रहों के साथ हो तो व्यक्ति को जीवन में एक बार ऋण तो लेना ही पड़ता है।
दूसरा व दशम भाव कमजोर हो, एकादश भाव में पाप ग्रह हो या दशम भाव में सिंह राशि हो, ऐसे लोग कर्म के प्रति अनिच्छुक होते हैं।
यदि व्यक्ति का 12 वां भाव प्रबल हो व दूसरा तथा दशम कमजोर तो जातक उच्च स्तरीय व्यय वाला होता है और 5. निरंतर ऋण लेकर अपनी जरूरतों की पूर्ति करता है।
आवास में वास्तु-दोष-पूर्वोत्तर कोण में निर्माण हो या उत्तर दिशा का निर्माण भारी व दक्षिण दिशा का निर्माण हल्का हो तो व्यक्ति के व्यय अधिक होते हैं और ऋण लेना ही पड़ता है।
उपाय
नित्य गोपाल विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें।
रविवार तक 10 वर्ष से कम उम्र की कन्याओं को भोजन कराएं।
हर मंगलवार लाल गाय को गुड़ खिलाएं।
शनिवार को ऋणमुक्तेश्वर महादेव का पूजन करें।
मंगल की भातपूजा, दान, होम और जप करें।
विधि-विधान पूर्वक लक्ष्मी-यन्त्र की स्थापना कर लक्ष्मी-स्तोत्र व कवच का पाठ करें या कराएं।
मंगल एवं बुधवार को कर्ज का लेन-देन न करें।
लाल, सफेद वस्त्रों का अधिकतम प्रयोग करें।
श्रीगणेश को प्रतिदिन दूर्वा और मोदक का भोग लगाएं।
लक्ष्मी- गायत्री मंत्र ‘ॐ महालक्ष्म्मै च विद्महे, विष्णु पत्नये च धीमहि, तन्नो लक्ष्मिः प्रचोदयात’ का जप करें या कराएं|
श्रीगणेश का अथर्वशीर्ष का पाठ प्रति बुधवार करें।
शिवलिंग पर प्रतिदिन कच्चा दूध चढ़ाएं।
अपनी राशी अनुसार जाने उधार और कर्ज से बचने के लिए उपाय
मेष घोड़े को हरा चारा खिलाए या रोगीयों को औषधि का दान दें।
वृष विद्यार्थियों को अध्ययन की सामग्री दान दें।
मिथुन हरे पौधों को पानी दें या तोते को हरी मिर्च खिलाए।
कर्क 10 वर्ष से कम उम्र वाली कन्या को मिठाई खिला कर भेंट दें।
सिंह किन्नर को हरी चुडिय़ां दान दें।
कन्या गाय को हरे मूंग खिलाए और हरे वस्त्र पहनें।
तुला जरूरतमंद को हरे वस्त्र दान दें।
वृश्चिक कुल देवी देवता को कांसे का दीपक लगांए।
धनु जीवनसाथी को आभूषण या पन्ना रत्न पहनाएं।
मकर किसी को ऋण दें या ऋण दिलाने में मदद करें।
कुंभ किसी वृद्ध को हरे वस्त्र का दान दें।
मीन गणेश जी को दूर्वा चढ़ाए।

कर्ज से मुक्ति पाने के आसन उपाय

कर्ज से मुक्ति पाने के आसन उपाय
ऐसा क्यों होता है कि कभी-कभी कर्ज चुकने का नाम ही नहीं लेता?कर्ज शब्द का भाव है कि किसी से उधार कुछ धन लिया और बाद मे उस पर कुछ अतिरिक्त धन देकर मुलधन को वापस कर देना । ये सबसे बुरी बीमारी है और अगर एक साल ब्याज की किस्त किसी कारण वष नही दें पाया तो अगले वर्श उस ब्याज को मूलधन मे जोड दिया जाता है और इस प्रकार ब्याज के उपर ब्याज देना पडता है । इसी प्रकार हम हर रोज या हर माह जैसा निष्चित किया गया है उनके हिसाब के मुताबिक ब्याज व मुलधन नही दे सके तो एक दिन ऐसा आऐगा कि हम कर्ज से इतने दब जायेंगे कि पूरी जिन्दगी दबे रहेंगे न खाना अच्छा खा सकेंगे और बच्चो का सही ढंग से पालन पोशण कर पाएंगे । और एक दिन जब कर्ज से ज्यादा दब जायेगें और किसी भी स्थिति मे चुकता नही कर पाएगें तो हमे दिवालिया घोशित कर दिया जाएगा कोई भी आदमी आदर से नही देखेगा और उसे दुनियां के लोग बडी घृणा से देखते है । लोग उसे कुछ भी देना पसन्द नही करते है ।शास्त्रों में मंगलवार और बुधवार को कर्ज के लेन-देन के लिए निषेध किया है। मंगलवार को कर्ज लेने वाला जीवनभर कर्ज नहीं चुका पाता तथा उस व्यक्ति की संतान भी इस वजह परेशानियां उठाती हैं।जीवन में प्रत्येक व्यक्ति को कभी न कभी अपनी जरूरतों की पूर्ति के लिए कर्ज लेना ही पड़ता है। कई बार व्यक्ति कर्ज को जल्दी चुकाने की इच्छा रखता है, लेकिन कर्ज का अंत नहीं आता है। कर्ज के लेन-देन में वार का भी विशेष महत्व होता है।
यदि व्यक्ति को किसी कारणवश कर्ज लेना पड़े तो वार देखकर लेना हितकर रहेगा।
कर्ज को न बढने दो इसे रोज चुकाओ बिना नागा किए भजन सुमिरन करो ताकि ब्याज और मुलधन दोनो को चुका दिया जाए ।
‘‘करि रोज भजन तु भाई । कर्मो की करि लै लाई’’ ‘‘फसलॅ पहुंच जाय खलियान’’
रोज़मर्रा की जिंदगी और घर-गृहस्ती के कामों के लिए इंसान कमोबेश ऋण लेता रहता है| यह कर्ज तब तक भार नहीं लगता है, जब तक वह चुकता रहता है| लेकिन समस्या तब बढ़ जाती है, जब कर्ज लेकर कर्जा चुकाएं या कर्जे पर कर्जा बढ़ता चला जाए| ऐसा क्यों होता है और ज्योतिष की दृष्टी से इसके कारण निवारणों पर ध्यान दिया जाए तो यह पता चलता है कि इस तरह के कुछ योग होते हैं जिनमे कर्ज चुकने में ही नहीं आता है|
कर्ज और वार का संबंध
सोमवार सोमवार की अधिष्ठाता देवी पार्वती हैं। यह चर संज्ञक और शुभ वार है। इस वार को किसी भी प्रकार का कर्ज लेने-देने में हानि नहीं होती है।
मंगलवार मंगलवार के देवता कार्तिकेय हैं। यह उग्र एवं क्रूर वार है। इस वार को कर्ज लेना शास्त्रों में निषेध बताया गया है। इस दिन कर्ज लेने के बजाए पुराना कर्ज हो तो चुका देना चाहिए।
बुधवार बुधवार के देवता विष्णुहैं। यह मिश्र संज्ञक शुभ वार है, मगर ज्योतिष की भाषा में इसे नपुंसक वार माना गया है। यह गणेशजी का वार है। इस दिन कर्ज देने से बचना चाहिए।
गुरुवार गुरुवार के देवता ब्रह्माहैं। यह लघु संज्ञक शुभ वार है। गुरुवार को किसी को भी कर्ज नहीं देना चाहिए, लेकिन इस दिन कर्ज लेने से कर्ज जल्दी उतरता है।
शुक्रवार शुक्रवार के देवता इन्द्र हैं। यह मृदु संज्ञक और सौम्य वार है। कर्ज लेने-देने दोनों दृष्टि से अच्छा वार है।
शनिवार शनिवार के देवता काल हैं। यह दारुण संज्ञक क्रूर वार है। स्थिर कार्य करने के लिए ठीक है, परंतु कर्ज लेन-देने के लिए ठीक नहीं है। कर्ज विलंब से चुकता है।
रविवार रविवार के देवता शिव हैं। यह स्थिर संज्ञक और क्रूर वार है। रविवार को न तो कर्ज दें और न ही कर्ज लें।
कर्ज के पिंड से छुटकारा नहीं हो रहा हो तो प्रत्येक बुधवार को गणेशजी के सम्मुख तीन बार ‘ऋणहर्ता गणेश स्तोत्र’ का पाठ करें और यथाशक्ति पूजन करें।
कुंडली के कर्ज कारक योग:
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मंगल ग्रह को कर्ज का कारक ग्रह माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार मंगलवार को कर्ज लेना निषेध माना गया है। वहीं बुधवार को कर्ज देना अशुभ है क्योंकि बुधवार को दिया गया कर्ज कभी नही मिलता। मंगलवार को कर्ज लेने वाला जीवनभर कर्ज नहीं चुका पाता तथा उस व्यक्ति की संतान भी इस वजह परेशानियां उठाती हैं।जन्म कुंडली के छठे भाव से रोग, ऋण, शत्रु, ननिहाल पक्ष, दुर्घटना का अध्ययन किया जाता है। ऋणग्रस्तता के लिए इस भाव के आलावा दूसरा भाव जो धन का है, दशम-भाव जो कर्म व रोजगार का है, एकादश भाव जो आय का है एवं द्वादश भाव जो व्यय भाव है, का भी अध्ययन किया जाता है। इसके आलावा ऋण के लिए कुंडली में मौजूद कुछ योग जैसे सर्प दोष व वास्तु दोष भी इसके कारण बनते हैं। इस भाव के कारक ग्रह शनि व मंगल हैं।
दूसरे भाव का स्वामी बुध यदि गुरु के साथ अष्टम भाव में हो तो यह योग बनता है। जातक पिता के कमाए धन से आधा जीवन काटता है या फिर ऋण लेकर अपना जीवन यापन करता है। सूर्य लग्न में शनि के साथ हो तो जातक मुकदमों में उलझा रहता है और कर्ज लेकर जीवनयापन व मुकदमेबाजी करता रहता है।12 वें भाव का सूर्य व्ययों में वृद्धि कर व्यक्ति को ऋणी रखता है। अष्टम भाव का राहू दशम भाव के माध्यम से दूसरे भाव पर विष-वमन कर धन का नाश करता है और इंसान को ऋणी होने के लिए मजबूर कर देता है इनके आलावा कुछ और योग हैं जो व्यक्ति को ऋणग्रस्त बनाते हैं।
उपर बताएं पाप ग्रह अगर मंगल को देख रहे हों तो भी कर्जा होता है।
कुंडली में खराब फल देने वाले घरों (छठे, आठवें या बारहवें) घर में कर्क राशि के साथ हो तो व्यक्ति का कर्ज लंबे समय तक बना रहता है।
षष्ठेश पाप ग्रह हो व 8 वें या 12 वें भाव में स्थित हो तो व्यक्ति ऋणग्रस्त रहता है।
छठे भाव का स्वामी हीन-बली होकर पापकर्तरी में हो या पाप ग्रहों से देखा जा रहा हो।
अगर कुंडली में मंगल कमजोर हो यानि कम अंश का हो तो ऋण लेने की स्थिति बनती है।
अगर मंगल कुंडली में शनि, सूर्य या बुध आदि पापग्रहों के साथ हो तो व्यक्ति को जीवन में एक बार ऋण तो लेना ही पड़ता है।
दूसरा व दशम भाव कमजोर हो, एकादश भाव में पाप ग्रह हो या दशम भाव में सिंह राशि हो, ऐसे लोग कर्म के प्रति अनिच्छुक होते हैं।
यदि व्यक्ति का 12 वां भाव प्रबल हो व दूसरा तथा दशम कमजोर तो जातक उच्च स्तरीय व्यय वाला होता है और 5. निरंतर ऋण लेकर अपनी जरूरतों की पूर्ति करता है।
आवास में वास्तु-दोष-पूर्वोत्तर कोण में निर्माण हो या उत्तर दिशा का निर्माण भारी व दक्षिण दिशा का निर्माण हल्का हो तो व्यक्ति के व्यय अधिक होते हैं और ऋण लेना ही पड़ता है।
उपाय
नित्य गोपाल विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें।
रविवार तक 10 वर्ष से कम उम्र की कन्याओं को भोजन कराएं।
हर मंगलवार लाल गाय को गुड़ खिलाएं।
शनिवार को ऋणमुक्तेश्वर महादेव का पूजन करें।
मंगल की भातपूजा, दान, होम और जप करें।
विधि-विधान पूर्वक लक्ष्मी-यन्त्र की स्थापना कर लक्ष्मी-स्तोत्र व कवच का पाठ करें या कराएं।
मंगल एवं बुधवार को कर्ज का लेन-देन न करें।
लाल, सफेद वस्त्रों का अधिकतम प्रयोग करें।
श्रीगणेश को प्रतिदिन दूर्वा और मोदक का भोग लगाएं।
लक्ष्मी- गायत्री मंत्र ‘ॐ महालक्ष्म्मै च विद्महे, विष्णु पत्नये च धीमहि, तन्नो लक्ष्मिः प्रचोदयात’ का जप करें या कराएं|
श्रीगणेश का अथर्वशीर्ष का पाठ प्रति बुधवार करें।
शिवलिंग पर प्रतिदिन कच्चा दूध चढ़ाएं।
अपनी राशी अनुसार जाने उधार और कर्ज से बचने के लिए उपाय
मेष घोड़े को हरा चारा खिलाए या रोगीयों को औषधि का दान दें।
वृष विद्यार्थियों को अध्ययन की सामग्री दान दें।
मिथुन हरे पौधों को पानी दें या तोते को हरी मिर्च खिलाए।
कर्क 10 वर्ष से कम उम्र वाली कन्या को मिठाई खिला कर भेंट दें।
सिंह किन्नर को हरी चुडिय़ां दान दें।
कन्या गाय को हरे मूंग खिलाए और हरे वस्त्र पहनें।
तुला जरूरतमंद को हरे वस्त्र दान दें।
वृश्चिक कुल देवी देवता को कांसे का दीपक लगांए।
धनु जीवनसाथी को आभूषण या पन्ना रत्न पहनाएं।
मकर किसी को ऋण दें या ऋण दिलाने में मदद करें।
कुंभ किसी वृद्ध को हरे वस्त्र का दान दें।
मीन गणेश जी को दूर्वा चढ़ाए।

ज्योतिष में शुक्र

1•भारतीय ज्योतिष में शुक्र

देवता दैत्य गुरु के रूप में प्रतिष्ठित हैं । प्रेम , विवाह , वीर्य , काम शक्ती, सुगंधित सौन्दर्य सामग्री , कामेच्छा , भोग-विलास , सुख – समृद्धि , नृत्य कला , संगीत , अभिनय , वाहन और जीवन को सुखमय बनाने के संसाधनों के कारक शुक्र देवता का स्वभाव मूलतः सत्रैणमाना जाता है । दक्षिण पूर्व दिशा के स्वामी शुक्र वृष व तुला राशि के स्वामी हैं । दैत्य गुरु शुक्र कन्या राशि में नीच व मीन राशि में उच्च के हो जाते हैं । वृष लग्न की कुंडली में बुद्ध व तुला लग्न की कुंडली में शनी को इष्ट देवता माना जाता है । मकर व मिथुन लग्न की कुंडली के इष्ट देव शुक्र देवता (Shukr Devta ) को ही माना जाता है । शुक् देवता का प्रिय रंग सफ़ेद, धातु रजत व रत्न हीरा है । कुबेर के ख़ज़ाने के रक्षक शुक्र जल तत्व ग्रह हैं और सातवीं दृष्टि से देखते हैं । शुक्र देवता कुंडली के चौथे भाव में दिशा बलि हो जाते हैं । इनकी महादशा अन्य अभी ग्रहों से अधिक बीस वर्ष की होती है । ये भरणी , पूर्वाफाल्गुनी और पूर्वाशाढा नक्षत्र के स्वामी हैं ।

2• शुक्र ग्रह  की कुछ विशेष जानकारी –
दिन: शुक्रवार
रंग: सफ़ेद
दिशा: दक्षिण पूर्व
राशि स्वामी: शुक्र
नक्षत्र स्वामी: भरणी , पूर्वाफाल्गुनी और पूर्वाशाढा
रत्न: हीरा
धातु: रजत
देवी: माँ दुर्गा
मित्र ग्रह: शनी, बुध
शत्रु ग्रह: सूर्य , मंगल
उच्च राशि: मीन
नीच राशि: कन्या
महादशा समय: 20 वर्ष
शुक्र का बीज मंत्र: ॐ शं शुक्राय नमः
3•शुभ शुक्र के लक्षण:
वैवाहिक जीवन में मधुरता रहनाभोग – विलास की वस्तुओं में बढ़ौतरी होनाशयन सुख प्राप्त होनामान यश की प्राप्ति होनापदोन्नति मिलनाजातक मीठा बोलने वाला होता हैजातक गायन , वादन , नृत्य , अभिनय कला में निपुण होता है

4•अशुभ शुक्र के लक्षण :

आर्थिक कष्ट आनास्त्री सुख में कमी आना सांसारिक सुखों में कमी आना गुप्त रोग हो जाना कामवासना का बढ़ जाना दाम्पत्य जीवन में कड़वाहट आना।

5•शुक्र ग्रह की शांति के उपाय –

अशुभ शुक्र के कुप्रभाव को कम करने के लिए चाँदी , चावल , दूध , सफ़ेद वस्त्र का दान करें ।नित नियम से दुर्गा सप्तशी का पाठ करें।
शुक्रवार को कन्या पूजन करें व कन्याओं को भोजन कराएँशुक्रवार का व्रत करें
अगर कुंडली में शुक्र का बलाबल कम हो तो हीरा धारण किया जा सकता है । हीरे को सोने या चांदी में मिडल फ़िंगर में धारण किया जाता है। हीरा धारण करने से पूर्व अपनी कुंडली किसी योग्य ज्योतिषी को अवश्य दिखा लें ।

मंगल को शुभ बनाने के लिए

1. मंगल को शुभ बनाने के लिए हनुमान चालीसा का प्रतिदिन पाठ करें.
2. मिट्टी के घड़े में गुड़ डालकर मंगलवार को सुनसान स्‍थान में रख आएं.
3. लाल रंग के वस्त्रों का ज्यादा उपयोग करें.
4. मंगलवार का व्रत रखें.
5. सिद्ध मंगल यंत्र धारण करें.

दूसरे भाव में मंगल
कुण्डली के दूसरे खाने में मंगल बैठा हो तो जातक 9 वर्षों तक रोग से पीड़ित रहता है. यदि जातक अपने भाइयों से छोटा है तो बड़े भाई की मृत्यु का योग बनता है. विवाहित जीवन में पति-पत्नी में आपसी क्लेश बना रहेगा. मंगल अशुभ हो तो जातक की मृत्यु लड़ाई-झगड़े में होने की आशंका रहती है.
उपाय और टोटके
1. दोपहर के समय बच्चों को फल बांटें.
2. मंगलवार का व्रत रखें.
3. लाल रूमाल सदैव अपने पास रखें.
4. सवा किलो या सवा पांच किलो रे‍वड़ियां बहते जल में प्रवाहित करें.
5. पांच छुहारे जल में उबालकर नदी में प्रवाहित करें.

तीसरे भाव में मंगल
कुण्डली में तीसरे खाने में मंगल बैठा हो तो जातक शराबी होता है. जातक चालबाज एवं धोखेबाज होता है. मंगल के अशुभ प्रभाव से जातक ब्लड प्रेशर का रोगी हो सकता है. मंगल अशुभ होकर जातक की हत्या भी करवा सकता है. मंगल की अशुभता के कारण जातक अपना काम स्वयं बिगाड़ लेता है.
उपाय एवं टोटके
1. चापलूस मित्रों से दूर रहें.
2. साढ़े पांच रत्ती मूंगा (रत्न) सोने की अंगूठी में जड़वाकर मंगलवार के दिन धारण करें.
3. मूंगा धारण करने की शक्ति (क्षमता) न हो तो 'सिद्ध मंगल यंत्र' धारण करें.
4. हाथी दांत से बनी वस्तुएं घर में न रखें.
5. चांदी की अंगूठी बाएं हाथ की उंगली में धारण करें.

चौथे भाव में मंगल
कुण्डली में चौथे खाने में मंगल बैठा हो तो जातक मांगलिक होता है. जातक संतानहीन हो सकता है. जातक रोग से पीड़ित रहता है. क्रोध के कारण स्वयं की हानि होती है. विवाह में समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं. जातक वृद्धावस्था में अंधा हो सकता है. मंगल चौथे खाने में हो और बुध 12वें हो तो जातक पूर्ण रूप से दरिद्र होता है.
उपाय एवं टोटके
1. त्रिधातु की अंगूठी धारण करें.
2. 'सिद्ध मंगल यंत्र' गले में अथवा दाहिने बाजू पर धारण करें. सिद्ध किया हुआ मंगल यंत्र शीघ्र शुभ फल प्रदान करता है.
3. देवताओं की मूर्तियां घर में स्‍थापित न करें.
4. अपने बिस्तर, तकिया आदि पर लाल रंग का कवर चढ़ाएं.

पांचवें भाव में मंगल
कुण्डली के पांचवें खाने (भाव) में मंगल बैठा हो तो जातक (जिसकी जन्म कुण्डली हो), पाप कर्म में लिप्त शराबी हो सकता है. जीवन में अनेक परेशानियां आएंगी. मिरगी का रोगी भी हो सकता है. जातक नेत्र रोगी भी हो सकता है. जातक की स्त्री गर्भस्राव रोग से परेशान हो सकती है.
उपाय एवं टोटके
1. रात को सिरहाने तांबे के लोटे में पानी भरकर रखें और सुबह उठकर उस जल को पीपल के वृक्ष की जड़ में डाल दें.
2. आंगन में नीम का पेड़ लगाएं.
3. 'सिद्ध मंगल यंत्र' गले में धारण करें या सवा पांच रत्ती मूंगा की अंगूठी बनवाकर दाहिने हाथ की उंगली में मंगलवार के दिन धारण करें.
4. मंगलवार का व्रत रखें.
5. मंगलवार को हनुमान मंदिर में जाकर हनुमान चालीसा बांटें.
6. वैदिक विधि से 'मंगल शांति पाठ' कराएं.

छठे भाव में मंगल
जिसकी कुण्डली में मंगल छठे भाव में होता है वैसा जातक बवासीर या ब्लडप्रेशर का रोगी हो सकता है. जातक कामुक स्वभाव होता है और पराई स्त्रियों पर बुरी नीयत रखता है. मंगल छठे भाव में हो और बुध आठवें भाव हो तो जातक की छोटी उम्र में ही उसकी माता का देहान्त हो जाने की आशंका रहती है. मंगल छठे और बुध 12वें भाव में हो तो जातक के भाई-बहनों की स्थि‍ति दयनीय होती है.
उपाय एवं टोटके
1. चार सूखे खड़कते ना‍रियल मंगलवार के दिन नदी में प्रवाहित करें.
2. मंगलवार के दिन हनुमानजी को सिंदूर चढ़ाएं और पीले लड्डू का प्रसाद चढ़ाकर लोगों को बांटें.
3. 'सिद्ध मंगल यंत्र' धारण करने से अशुभता का नाश होगा और शुभ फल मिलेगा.
4. हनुमान चालीसा या हनुमान स्त‍ुति बांटें.
5. कुंवारी कन्याओं का पूजन करें.

सातवें भाव में मंगल
कुण्डली के सातवें घर (भाव) में मंगल बैठा हो तो जातक की स्त्री क्रोधी स्वभाव की होगी. जातक स्वयं क्रोध के कारण अपना नुकसान कर लेता है. जातक प्राय: पुत्रहीन होता है. ऐसे जातकों की पराई स्त्री से संबंध होते हैं.
उपाय एवं टोटके
1. चांदी की ठोस गोली बनवाकर सदैव अपनी जेब में रखें.
2. मंगलवार के दिन लस्सी जरूर पियें.
3. लाल रूमाल अपनी जेब में रखें.
4. बहन को मंगलवार के दिन अपने हाथ से मिठाई खिलाएं.
5. 'सिद्ध मंगल यंत्र' धारण करें.
6. हनुमानजी का व्रत रखें, हनुमान चालीसा बांटें.

आठवें भाव में मंगल
कुण्डली में आठवें भाव (घर) में मंगल बैठा हो तो मंगल के अशुभ प्रभाव से जातक अल्प आयु वाला तथा दरिद्र होता है. जातक के लिए 28 वर्षों तक मौत का फंदा बना रहता है. मंगल आठवें भाव में हो और बुध छठे भाव में हो तो जातक की माता की मृत्यु जातक के बचपन में हो जाने की आशंका रहती है. जातक 'मर्डर केस' में फंस सकता है. जातक रोगी होता है.
उपाय एवं टोटके
1. विधवा स्त्री की सेवा करें.
2. चांदी की चेन धारण करें.
3. 'सिद्ध मंगल यंत्र' जरूर धारण करें.
4. त्रिधातु की अंगूठी धारण करें.
5. हनुमान चालीसा का प्रतिदिन पाठ करें और मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा हनुमानजी के मंदिर में जाकर बांटें.
6. लाल रूमाल सदैव अपने पास रखें.

नौवें भाव में मंगल
कुण्डली में नवम् भाव में मंगल हो तो जातक क्रोधी स्वभाव का होता है. विद्या अधूरी रह जाती है. जातक झूठा होता है. ईमानदार हो फिर भी बदनामी मिलती है. जीवन के क्षेत्र में सफलता कम मिलती है. ऐसा जाकत स्त्री की कमाई पर जीवन-यापन करता है.
उपाय एवं टोटका
1. मंगलवार को 21, 51 या 101 हनुमान चालीसा बांटें.
2. मंगलवार को हनुमानजी को सिंदूर एवं लड्डू चढ़ाएं.
3. 'सिद्ध मंगल यंत्र' धारण करें.
4. तांबे के सात चौकोर टुकड़े बनाकर मिट्टी के नीचे दबा दें.
5. प्रतिदिन 'हनुमान स्तुति' का पाठ करें.

दसवें भाव में मंगल
दसवें खाने में अगर मंगल बैठा हो तो जातक को चोरी के आरोप में जेल जाना पड़ सकता है. मंगल दसवें, सूर्य चौथे, बुध छठे खाने में हो तो जातक एक आंख का काना हो सकता है. मंगल के साथ कोई पापी ग्रह हो तो जातक बर्बाद हो जाता है. मंगल के अशुभ प्रभाव से जातक 15 वर्ष तक बीमारी से पी‍ड़ित हो सकता है. उपाय
उपाय एवं टोटका
1. संतानहीन की सेवा करें.
2. घर में हिरण पालें.
3. मंगलवार को मीठा भोजन करें.
4. हनुमानजी को लड्‍डू चढ़ाएं.
5. मंगलवार को हनुमान चालीसा बांटें.

ग्‍यारहवें भाव में मंगल
मंगल ग्यारहवें भाव में हो तो जातक कर्जदार रहता है. जातक की संतान झगड़ालू होती है. जातक को मित्रों से धोखे मिलते हैं. शिक्षा में विघ्न बाधाएं उत्पन्न होती हैं. आजीविका के लिए कठोर संघर्ष करना पड़ सकता है.
उपाय एवं टोटका
1. बिना जोड़ वाला सोने का छल्ला धारण करें.
2. काला कुत्ता पालें.
3. केसर का तिलक लगाएं.
4. कर्ज से मुक्ति के लिए प्रभावकारी 'सिद्ध मंगल यंत्र' धारण करें.
5. मंगल व्रत रखें और पीले लड्‍डू का प्रसाद बांटें.

बारहवें भाव में मंगल
कुण्डली में बारहवें भाव में अगर मंगल हो तो जातक को शत्रुओं से हानि की आशंका रहती है. लाभ से अधिक व्यय होगा. घर में चोरी होने का भय बना रहता है. पत्नी से अनबन की संभावना प्रबल रहती है. जातक संतानहीन हो सकता है.
उपाय एवं टोटका
1. चांदी की चेन धारण करें.
2. लाल रूमाल सदैव अपने पास रखें.
3. एक किलो पतासे मंगल के दिन बहते जल में प्रवाहित करें.
4. 'सिद्ध मंगल यंत्र' धारण करने से शुभ लाभ होगा.
5. तंदूर में मीठी रोटी सेंककर कुत्ते को खिलाएं.
6. साढ़े पांच रत्ती मूंगा सोने की अंगूठी में जड़वाकर धारण करें.

ग्रहों से होने वाली परेशानियां

ग्रहों से होने वाली परेशानियां

प्रत्येक जातक की कुंडली में अशुभ ग्रहों की स्थिति अलग-अलग रहती है। कुंडली में कुल बारह भाव होते हैं सभी भाव के अलग-अलग स्वामी होते हैं। आप खुद ही देख सकते हैं की कौन सा ग्रह खराब है और उसका उपाय कैसे करें। ग्रहों से होने वाली परेशानियां इस प्रकार हैं।

सूर्य : सरकारी नौकरी या सरकारी कार्यों में परेशानी, सिर दर्द, नेत्र रोग, हृदय रोग, अस्थि रोग, चर्म रोग, पिता से अनबन आदि।

चंद्र : मानसिक परेशानियां, अनिद्रा, दमा, कफ, सर्दी, जुकाम, मूत्र रोग, स्त्रियों को मासिक धर्म, निमोनिया।

मंगल : अधिक क्रोध आना, दुर्घटना, रक्त विकार, कुष्ठ रोग, बवासीर, भाइयों से अनबन आदि।

बुध : गले, नाक और कान के रोग, स्मृति रोग, व्यवसाय में हानि, मामा से अनबन आदि।

गुरु : धन व्यय, आय में कमी, विवाह में देरी, संतान में देरी, उदर विकार, गठिया, कब्ज, गुरु व देवता में अविश्वास आदि।

शुक्र : जीवन साथी के सुख में बाधा, प्रेम में असफलता, भौतिक सुखों में कमी व अरुचि, नपुंसकता, मधुमेह, धातु व मूत्र रोग आदि।

शनि : वायु विकार, लकवा, कैंसर, कुष्ठ रोग, मिर्गी, पैरों में दर्द, नौकरी में परेशानी आदि।

राहु : त्वचा रोग, कुष्ठ, मस्तिष्क रोग, भूत प्रेत वाधा, दादा से परेशानी आदि।

केतु : नाना से परेशानी, भूत-प्रेत, जादू टोने से परेशानी, रक्त विकार, चेचक आदि।

केतु का स्वभाव एवं प्रभाव

केतु का स्वभाव एवं प्रभाव
केतु ग्रह को लम्बा, हस्ट पुष्ट व् धुम्रवर्ण छाया ग्रह
कहा गया है! केतु ग्रह के सिर नहीं है, सिर्फ धड
है!
इनकी क्रियाएं तांत्रिक हैं, इसलिए केतु ग्रह अन्य
ग्रहों की तुलना में सर्वाधिक
रहस्यवादी हैं! केतु गहरे ध्यान में बैठने
की सामर्थ्य रखतें हैं! केतु आत्मवादी,
सहिष्णु और धैर्यशाली हैं! केतु
व्यक्ति को विश्वासघाती, हृदयहीन एवं
कृतघ्न बना देतें हैं! केतु ग्रह अचानक बहुत कुछ देतें हैं
तो अनायास ले भी लेतें हैं! ये व्यवधान व् रूकावट
लाना अपना कर्तव्य समझतें हैं! केतु गृह
की प्रकृति में अचानक उन्नति या अवनति, मान, अपमान,
दुर्घटना, पदच्युति, घबडाहट, उलझन, आर्थिक
तंगी और उत्साहहीन करना है !
केतु का मंगल के साथ सम्बन्ध
हो तो व्यक्ति क्रोधी,कपटी,चंचल, कठोर,
सहनशील, एवं भोग भीरु होता है ! चन्द्र
से सम्बन्ध हो तो अस्थिर मन, क्लेश, माता को कष्ट और
पिता या मित्र से दुःख होता है!
बुध से सम्बन्ध हो तो क्रूर वाद विवाद करने वाला, गैस्ट्रिक रोग से
ग्रस्त होता है! गुरु ग्रह से सम्बन्ध हो तो पूजा पाठ योग ध्यान
आदि में रूचि उत्पन्न होती है! शुक्र ग्रह से
सम्बन्ध हो तो व्यक्ति आलसी, वाचाल,
निरुत्साही, व कुटुंब विरोधी होता है!
शनि ग्रह से सम्बन्ध हो तो व्यक्ति पराक्रमी,
परिश्रमी, विद्वान् व् कुशल वक्ता होता है, लेकिन
आर्थिक तंगी व् उदार रोगों का सामना करना पड़ सकता है!
केतु ग्रह की रूचि तंत्र मंत्र
रहस्यमयी विद्याओं और आध्यात्मिक कार्यों में
होती है! केतु ग्रह से प्रभावित
व्यक्ति रहस्यमयी कार्यों को करने में तत्पर रहते हैं
और जासूस, ओझा,भविष्यवक्ता , धर्मगुरु, उपदेशक, पर्यटक, संचार
विभाग आविष्कारक आदि होते हैं!
केतु ग्रह सर्वाधिक बलि होने पर व्यक्ति के जीवन पर
४८ से ५४ वें वर्ष में विशेष प्रभाव डालतें हैं! यदि इस अवधि में
दशा व् अन्य गृह भी अनुकूल हो तो सर्वाधिक
उन्नति होती है!
केतु ग्रह से प्रभावित व्यक्ति शारीरिक रूप से दुर्बल
होतें है! कार्य की अधिकता से घबरा जाते हैं और इनके
व्यव्हार में चिड चिड़ापन आ जाता है! इनकी पाचन
शक्ति कमज़ोर होती है! प्रायः ये चर्म रोग, श्वेत
कुष्ट , गर्भस्त्राव, मसूरिका, जलोदर, विषरोग, खांसी,
सर्दी जुखाम, गुप्तरोग, गठिया,रक्तविकार
,पथरी, कैंसर, वात पित जनित रोग, एवं स्नायविक
दुर्बलता से शारीरिक कष्ट उठाते हैं! स्वास्थ्य हेतु
संतुलित सात्विक आहार का सेवन करना चाहिए एवं यदि धुम्रपान
आदि नशीली वस्तुओं का प्रयोग करते हैं
तो उन्हें त्याग देना चाहिए!